सिहोरा को जिला बनाने का आंदोलन 10 दिन से जारी:लोग बोले- हम मरने-मारने को तैयार; पूर्व RSS प्रचारक अन्य त्यागकर बैठे

‘सिहोरा को जिला बनाने की हमारी मांग 26 साल से भी ज्यादा पुरानी है। हम लगातार आंदोलन करते चले आ रहे हैं। अभी कुछ ही दिनों पहले हमारे लक्ष्य जिला आंदोलन समिति के सदस्यों ने खून के दिए जलाए थे। शासन को चेताने के लिए भू-समाधि भी ली थी। कुछ युवा प्रशासन के सामने आत्मदाह की कोशिश भी कर चुके हैं। हमारी मांग नहीं सुनी गई तो हमने फिर आंदोलन शुरू किया है। ये आमरण सत्याग्रह है। सिहोरा जिला नहीं बना तो हम मरने मारने के लिए तैयार हैं। सीएम से हमारी बात नहीं हुई तो ये आंदोलन उग्र हो जाएगा।’ ये कहना है सिहोरा को जिला बनाने की मांग करने वाले आंदोलन में शामिल अधिवक्ता कमलेश सोनी का। सिहोरा को जिला बनाने को लेकर 6 दिसंबर से आमरण सत्याग्रह चल रहा है। इसमें सिहोरा तहसील के सभी लोग बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। आंदोलन का मुख्य चेहरा आरएसएस के पूर्व प्रचारक रहे प्रमोद साहू बने हुए हैं। प्रमोद अन्न जल त्यागकर अनशन पर बैठे हैं। इसी बीच उनकी तबीयत बिगड़ने के चलते उन्हें आईसीयू में भी भर्ती किया गया।
इसके बाद डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने खुद उनसे कॉल पर बात की। अन्न-जल ग्रहण करने का अनुरोध किया साथ ही बीते मंगलवार को मुख्यमंत्री के साथ बैठकर बात करने और मुद्दे का समाधान निकालने का भरोसा दिलाया। प्रमोद साहू ने जल को ग्रहण कर लिया लेकिन अन्य का त्याग कर अभी भी अनशन पर हैं। मंगलवार भी बीत चुका है। डिप्टी सीएम के किसी करीबी के देहांत के चलते आंदोलनकारियों की सीएम से मुलाकात स्थगित हो गई है। दैनिक भास्कर की टीम ने सिहोरा पहुंचकर आंदोलनकारियों और आम लोगों से बात की। जाना कि सिहोरा को जिला बनाने के आंदोलन में अबतक क्या क्या हुआ? राजनेताओं ने अब तक उनसे क्या वादे किए? मांग पूरी क्यों नहीं हो रही है? क्या पेंच फंस रहे हैं? डिप्टी सीएम के दिए भरोसे पर उन्हें कितनी उम्मीद है। वो कब तक ये आंदोलन करते रहेंगे? पढ़िए ये रिपोर्ट… दिग्विजय सिंह ने जिला घोषित किया था आंदोलन में शामिल पुरुषोत्तम गुप्ता ने कहा कि हमने सिहोरा को जिला बनाने के लिए साल 1999 से आंदोलन शुरू कर दिए थे। अक्टूबर 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक तौर पर किसान सम्मेलन में सिहोरा को जिला बनाने की घोषणा की थी। साल 2003 में मझौली, बहोरीबंद और ढीमरखेड़ा तहसील को शामिल करते हुए जिला बनाने को लेकर राजपत्र में भी इसका प्रकाशन कर दिया गया था।
मध्य प्रदेश की केबिनेट द्वारा इसको मंजूरी भी प्रदान कर दी गई थी। 3 दिन बाद ही चुनाव की आचार संहिता लगनी थी। इसके चलते सरकार ने निर्णय लिया कि 26 जनवरी 2004 को सिहोरा जिला अस्तित्व में आ जाएगा। चुनाव हुए दिग्विजय सरकार नहीं रही। भाजपा की उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं। 26 जनवरी को सिहोरा जिला नहीं बनाया गया। उमा भारती ने कहा था- देवउठनी एकादशी को बन जाएगा
आंदोलन में शामिल एडवोकेट राजभान मिश्र ने कहा, उमा भारती प्रदेश की मुखिया बनीं। 6 जून को पंचज अभियान में सिहोरा आईं। सार्वजनिक मंच पर कहा, कि सिहोरा को एक पुष्ट जिला बनाना चाहती हैं। उन्होंने कहा था कि अगली देवउठनी एकादशी (नवंबर महीने) को सिहोरा जिला बन जाएगा। लेकिन ये वादा खोखला निकला। 2005 में विधानसभा में प्रश्न का जवाब देते हुए तत्कालीन राजस्व मंत्री दिलीप भटेरे ने कहा था कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था कमजोर है इसलिए अभी जिला घोषित नहीं कर सकते। सिहोरा मध्य प्रदेश या कह लें देश की सबसे बड़ी तहसील थी। इसमें 4 विकासखंड आते थे। दो विकासखंडों बहोरीबंद और ढीमरखेड़ा को काटकर कटनी जिले में शामिल कर दिया गया। ये सिहोरा देश का भौगोलिक केंद्र बिंदू है। निवाड़ी, मऊगंज पांढुर्णा जैसी छोटी तहसीलों को जिला बना दिया गया। एसपी-कलेक्टर की पदस्थापना तक रहेगी लड़ाई
सिहोरा के नागरिक धनश्याम बड़गैयां ने कहा कि ये आंदोलन जिले का नहीं है। ये जिले के साथ साथ आने वाली पीढ़ी के भविष्य का आंदोलन है। हमारी सबसे बड़ी तहसील को दो जिलों में बांट दिया गया है। जिन खंडों को सिहोरा से कटनी में मिलाया गया है। वहां के लोगों को जिले तक पहुंचने के लिए 100-150 किमी तक जाना पड़ता है। जबकि वो सिहोरा से 25-30 किमी की दूरी पर हैं। इस आंदोलन की बात करें तो ये जन आंदोलन है। किसी पार्टी का आंदोलन नहीं है। इसमें भाजपा कांग्रेस समेत तमाम पार्टियां शामिल हैं। आम आदमी शामिल है। लोग छाती में गोली खाने को तैयार हैं। मरने मारने को तैयार हैं। बस अभी देख रहे हैं कि ये भाजपा सरकार और मोहन यहां क्या कर रहे हैं। ये हम समझ चुके हैं कि भाजपा के लोग हमें वेवकूफ बना रहे हैं। उन्होंने अन्न का त्याग कर अनशन पर बैठे आरएसएस के पूर्व प्रचारक को बहलाने की कोशिश की है। कलेक्टर-एसपी की पोस्टिंग तक आंदोलन चलता रहेगा। हमारे आंदोलनकर्ता अन्न-जल त्यागकर आंदोलन में बैठे। उनकी तबियत बिगड़ी। वो आईसीयू में भर्ती हुए। 13 दिसंबर को क्षेत्रीय विधायक ने कॉल पर उनकी डिप्टी सीएम से बात कराई। डिप्टी सीएम ने उन्हें भरोसा दिया कि वो 16 दिसंबर को उनकी बात सीएम से कराएंगे। सार्थक हल निकालेंगे। डिप्टी सीएम ने प्रमोद साहू जी से अन्न जल ग्रहण करने की बात कही। प्रमोद जी ने जल तो ग्रहण कर लिया है लेकिन वो अभी भी अन्न का त्याग किए हुए हैं।

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