नवा रायपुर में राजभवन, सीएम हाउस के अलावा मंत्रियों और अफसरों के बंगले के निर्माण में पिछली सरकार के मंत्रियों और अफसरों की वजह से पूरे प्रोजेक्ट का खर्च 551 करोड़ से बढ़कर 833 करोड़ हो गया। ऐसा इसलिए क्योंकि सेक्टर-18 में जहां मंत्रियों और अफसरों के लिए सरकारी बंगले बनाए जा रहे थे, वो जगह उन्हें पसंद नहीं आई। अफसरों ने निरीक्षण के बाद पूरा प्रोजेक्ट सेक्टर-24 में शिफ्ट करने का निर्देश दे दिया। सेक्टर-18 में मुरूम वाली जमीन थी जबकि सेक्टर-24 में जमीन पथरीली और काली मिट्टी वाली है। इस वजह से फाउंडेशन मजबूत बनाने में ज्यादा पैसे खर्च हो गए और करीब 300 करोड़ का बजट बढ़ गया। बजट बढ़ने का असर राजभवन के काम पर पड़ा और 8 माह से काम बंद हो गया। राजभवन का काम बंद होने के बाद पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने जब शासन से अतिरिक्त बजट मांगा, तब पूछताछ हुई कि बजट कैसे खत्म हो गया। तब पता चला कि प्राेजेक्ट की जगह बदलने के कारण ही खर्च बढ़ा है। नवा रायपुर में राजभवन, सीएम हाऊस के साथ मंत्री और अफसरों के बंगले बनाने का प्रोजेक्ट 2018 में तय किया गया था। प्रोजेक्ट के तहत राजभवन व सीएम हाऊस के आस-पास ही मंत्रियों के 14 और अफसरों के 85 बंगले बनाना था। तत्कालीन सरकार ने पीडब्ल्यूडी को सेक्टर-18 में करीब 200 एकड़ में बंगले बनाने का निर्देश दिया। इस प्रोजेक्ट के लिए 551 करोड़ का एक साथ टेंडर जारी किया गया। पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने आर्किटेक्ट से इसकी ड्राइंग डिजाइन बनाकर सरकार के सामने प्रेजेंटेशन दिया। प्रोजेक्ट के तहत बंगले बनाने का काम शुरु करने की तैयारी थी, उसी दौरान प्रदेश में अचानक सरकार बदल गई। राज्य में कांग्रेस की सरकार बनते ही प्रोजेक्ट पर ब्रेक लग गया। करीब डेढ़ साल बाद 2020 में नई सरकार के मंत्रियों और अफसरों ने बंगलों के लिए प्रस्तावित जगह का निरीक्षण किया। उसके बाद ही अचानक प्लान बदलकर इसे सेक्टर-24 में बनाने का निर्देश जारी कर दिया। उनका तर्क था कि मंत्रालय, गेस्ट हाउस के अलावा ज्यादातर सरकारी कार्यालय सेक्टर 24 में है। ऐसी दशा में मंत्री व अफसरों के बंगले भी उसी के करीब बनाने से आम लोगों को आसानी होगी। ये तर्क देकर ही प्रोजेक्ट सेक्टर-24 में शिफ्ट कर वहां काम चालू करवाया गया। सेक्टर-24 की जमीन पथरीली और काली मिट्टी वाली होने के कारण बजट बढ़ गया। राजभवन का स्ट्रक्चर तैयार फर्नीचर, बिजली का काम बाकी पीडब्ल्यूडी ने जो प्रोजेक्ट बनाया है उसके अनुसार राजभवन के निर्माण पर 103 करोड़ खर्च होंगे। इसमें 2 मंजिला गर्वनर निवास के अलावा 2 मंजिला दरबार हाल, 2 मंजिला सचिवालय बंगला, 1 एडीसी बंगला और स्टाफ के लिए 192 क्वार्टर बनाना है। फिलहाल भवन का स्ट्रक्चर खड़ा हो गया। इसे सितंबर 2024 तक बनाकर देना था। लेकिन अभी केवल स्ट्रक्चर बना है। स्ट्रक्चर की फिनिशिंग जिसमें फ्लोरिंग, फर्नीचर, डोर-विंडो और बिजली का काम बचा है। पीडब्ल्यूडी के पास बजट खत्म हो गया है। इस कारण है कि पिछले 8 माह से काम बंद है। पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने बताया कि अभी बजट की मंजूरी मिली है। इसी माह से काम चालू कर दिया जाएगा। 2027 तक काम पूरा कर लिया जाएगा। भास्कर एक्सपर्ट- समीर बाजपेयी, एनआईटी काली मिट्टी पानी पड़ने से फैल जाती है, इसलिए होती है कमजोर
काली मिट्टी कमजोर मिट्टी मानी जाती है। ऐसी मिट्टी में बड़े स्ट्रक्चर का फॉउंडेशन करते समय ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है काली मिट्टी को पानी मिलता है तो फैल जाती है और सुखी होने पर सिकुड़ जाती है। इसलिए किसी भी स्ट्रक्चर का फाउंडेशन इसकी तासीर के हिसाब से बनाना पड़ता है। अगर सावधानी नहीं बरती गई तो दीवारों में दरार आ जाती है। इससे गिरने खतरा रहता है। इसलिए फाउंडेशन की मजबूती बढ़ाने से बजट बढ़ जाता है। इसकी तुलना में दानेदार मिट्टी अधिक मजबूत होती है। काली मिट्टी की तुलना में इसमें फाउंडेशन ज्यादा मजबूत रहता है। ठेका एजेंसी का 200 करोड़ बकाया
प्रोजेक्ट का ठेका लेने वाली एजेंसी का 200 करोड़ रुपए बकाया है। पिछले एक साल से पेमेंट अटका है। इस वजह से पीडब्ल्यूडी के अफसर ठेका एजेंसी पर काम करने का दबाव नहीं बना पा रहे हैं। अब बजट मिला है। बकाया भुगतान करने के साथ बाकी काम भी पूरा कराया जाएगा। बजट स्वीकृत कर दिया है काम चालू होगा
पिछली सरकार के समय क्या सिचुएशन थी। पता नहीं। इस बारे में मैं अभी कुछ नहीं बोल सकता, लेकिन बजट बढ़ा है तो देना पड़ेगा, क्योंकि काम पूरा करवाना है। हमने बजट स्वीकृत कर दिया है। काम चालू हो जाएगा।
अरुण साव, पीडब्ल्यूडी मंत्री छग शासन


