सीएस बोले- टैक्स चोरी में बड़े लोग हैं, कार्रवाई करो‎:मुझे पता है स्टील व सुपारी-गुटखा में 700 करोड़ की GST चोरी हो रही है

रेवेन्यू कलेक्शन की मीटिंग में मुख्य सचिव (सीएस) अनुराग जैन ने वाणिज्यिककर विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने तल्ख अंदाज में कहा कि स्टील और गुटखा-सुपारी के कारोबारी करीब 700 करोड़ रुपए जीएसटी की चोरी कर रहे हैं। बड़े लोग इसमें शामिल हैं। विभाग को चाहिए कि वह इसे गंभीरता से ले और कार्रवाई करे। लीकेज की वजह से ही रेवेन्यू के लक्ष्य से पिछड़ रहे हैं। सीएस ने शुक्रवार को वाणिज्यिककर, वित्त, फॉरेस्ट, खनिज, नगरीय विकास समेत उन विभागों की बैठक ली, जो रेवेन्यू कलेक्शन से जुड़े हैं। इसमें वित्त विभाग की ओर से बताया गया ​कि नवंबर 2025 तक हुए टैक्स कलेक्शन में करीब 6000 करोड़ की कमी है। यह देखने के बाद मुख्य सचिव ने सभी विभागों के अधिकारियों से कहा कि वे रेवेन्यू के शॉर्ट-फॉल को ठीक करें। यह विश्लेषण करें कि लीकेज कहा हैं, उसे कैसे रोका जाए और नई संभावनाएं कहां से बन सकती है। ऐसा करेंगे तब जाकर मार्च 2026 तक के संभावित टैक्स कलेक्शन के लक्ष्य को पाया जा सकेगा। खास तौर पर जीएसटी का ध्यान रखा जाए कि इसके कलेक्शन में कम न हो। सूत्रों के अनुसार अधिकारियों ने बताया कि जीएसटी के टैक्स स्लैब में बदलाव के कारण भी टैक्स कलेक्शन प्रभावित हुआ है। कैबिनेट में मंत्रियों ने किया था रेखांकित यहां बता दें कि देश में जीएसटी कलेक्शन में अक्टूबर 2025 में वृद्धि दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश में इसमें गिरावट को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में मंत्रियों ने भी इसे रेखांकित किया था। वित्त से पूछा था कि जीएसटी कलेक्शन में मप्र क्यों पिछड़ रहा है। मप्र में जीएसटी (केंद्र और राज्य) से कलेक्शन का लक्ष्य करीब 75 हजार करोड़ है। नगरीय विकास की स्थिति ठीक नहीं
नगरीय विकास और आवास विभाग के टैक्स कलेक्शन की कमियों को भी बताया गया। सीएस ने कहा, निकायों में इकट्ठा होने वाले टैक्स में भी काफी कमी चल रही है। प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन तो आधा हो रहा है। यह स्थितियां ठीक नहीं हैं। यह बात भी सामने आई कि जिलों में कलेक्टरों की ओर से छोटे प्लॉट की रजिस्ट्री रोकी जा रही है। उज्जैन-ग्वालियर में छूट क्यों दी जाए?
बैठक में यह सवाल भी उठा कि उज्जैन और ग्वालियर मेले में वाहनों की बिक्री में छूट दी जाती है, लेकिन यह छूट उन लोगों को क्यों मिलनी चाहिए, जो एक-एक करोड़ की गाड़ियां खरीद रहे हैं। बैठक में बताया गया कि करीब एक हजार महंगी गाड़ियां बिकी हैं। इनकी कीमत एक करोड़ तक थी। सीएस ने कहा कि यह देखना चाहिए कि ये गाड़ियां किसने खरीदी।

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