आम लोगों का सफर आसान करने, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए बनाया गया बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) कॉरिडोर के हाल सुधरने की बजाय बेहाल होते जा रहे है। सीकर रोड पर अंबाबाड़ी से रोड नंबर-14 तक बनाए कॉरिडोर में यात्रियों की सुविधाओं के लिए बनाए गए 11 बस स्टॉप पर न तो बैठने के लिए कुर्सियां है और ना ही पानी की सुविधा है। ऐसे में मजबूरन बस का घंटों खड़े-खड़े इंतजार करते रहते हैं। चौमूं पुलिया, रोड नंबर-एक, ढहर का बालाजी बस स्टॉप पर जगह-जगह गंदगी का ऐसा आलम है कि उधर से गुजर नहीं सकते। यहां तक की बदबू मारने से यात्रियों पर बीमारियां का संकट मंडराता रहता है। बीच-बीच में रेलिंग टूटी होने और सड़क पर गड्ढे हादसे काे न्यौता दे रहे है। ऐसा लग रहा है वर्ल्ड क्लास सुविधा देने के नाम थर्ड क्लास सुविधा मिल रही है। यह खुलासा भास्कर की ओर से 7 किमी के बीआरटीएस कॉरिडोर की ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान हुआ है। इसलिए बनाया था… बीआरटीएस बनाने के पीछे मकसद था कि लोग निजी वाहनों की बजाय बीआरटीएस कॉरिडोर में चलने वाली बसों में सफर करें। इससे सड़कों पर यातायात का दबाव कम होने से जाम भी नहीं लगेगा और समय भी बचेगा। साथ ही सड़क दुर्घटना में भी कमी आएगी। यह प्रोजेक्ट धरातल पर तो उतरा, लेकिन सही तरीके से संचालन नहीं करने से अब यह परेशानी का सबब बनता जा रहा है। येे 10 बड़ी खामियां ये है बस स्टॉप 1. चौमूं पुलिया
2. भवानी निकेतन
3. ढहर का बालाजी
4. रोड नंबर-7
5. मुरलीपुरा बस स्टॉप
6. रोड नंबर एक
7. रोड नंबर-5
8. रोड नंबर-8
9. रोड नंबर-9
10. रोड नंबर-12
11. रोड नंबर-14 कब-क्या समाधान बीआरटीएस कॉरिडोर को या तो पूरी तरह से खत्म किया जाए। या फिर पूरी तरह से सुविधा विकसित की जाएं, जिससे लोगों को फायदा मिल सकें। पानी और टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए। कॉरिडोर के आसपास एक 108 एंबुलेंस सुविधा होनी चाहिए, जिससे घायलों को तुरन्त अस्पताल पहुंचाया जा सकें। बीच-बीच में कट को बंद करना चाहिए। दुपहिया वाहनों पर प्रतिबंध होना चाहिए।


