राजन गोसाईं/भूपिंदर सिंह भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर का ऐलान भले हो चुका है, लेकिन बीती रात आसमान में हुए धमाकों ने एक बार फिर सरहदी गांवों के लोगों के दिलों में जंग का डर जिंदा कर दिया है। अटारी, राजाताल और नेष्टा जैसे गांवों के लोग अब भी बेचैन हैं। उनका कहना है कि वह चाहते हैं कि दोनों मुल्कों के बीच जंग न हो, ताकि उन्हें अपने घर-खेत न छोड़ने पड़ें और जो थोड़ी-बहुत रोजी-रोटी चल रही है, वह भी खत्म न हो। ग्रामीणों का कहना है कि हर बार जब हालात बिगड़ते हैं, सरहद से सबसे पहले नुकसान उन्हें ही झेलना पड़ता है। हालांकि वह बातचीत के जरिए सभी समस्याओं का हल चाहते हैं, लेकिन पाकिस्तान की ओर से अब भी उन्हें कोई भरोसा नहीं है। सीमा सील होने और अटारी पर होने वाली रिट्रीट सेरेमनी बंद होने से कई लोगों की रोजी-रोटी छिन गई है। ऑटो और टैक्सी चलाने वाले युवा और सीमा पर फड़ी लगाने वाले दुकानदार इस समय बेरोजगार हो गए हैं। गुरविंदर सिंह, कुलविंदर सिंह, भगवंत सिंह का कहना है कि का कहना है कि बॉर्डर खुला रहेगा तो कारोबार चलेगा और वे अपने परिवारों को पाल सकेंगे। सीमा के साथ सटे गांवों राजाताल और नेष्टा के लोगों का कहना है कि दोनों मुल्कों में सुलह होनी चाहिए, तभी सुकून की जिंदगी जी सकेंगे।


