सीधी शहर की बीना जायसवाल ने कबाड़ और बेकार सामग्री का उपयोग कर रोजगार का नया रास्ता बनाया है। बिना किसी औपचारिक शिक्षा के, उन्होंने महिला सशक्तिकरण और स्वच्छता के क्षेत्र में मिसाल कायम की है। बीना ने सीमित संसाधनों का इस्तेमाल कर प्लास्टिक, थर्माकोल, नारियल के खोल, पुराने मटके और अन्य अनुपयोगी वस्तुओं से सजावटी उत्पाद तैयार करना शुरू किया। उनके प्रमुख उत्पादों में टेडी बेयर, लैंप, पावदान, हैंगिंग पॉट और स्वच्छता संदेश वाले मॉडल शामिल हैं। पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर लगाए सीधी शहर के पार्कों और सार्वजनिक स्थलों में उनके द्वारा बनाए गए कृत्रिम पेड़, पुराने मटकों से बने मानव आकृतियां और स्वच्छता मॉडल लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं। इन कलाकृतियों से पर्यावरण संरक्षण और कचरा व प्लास्टिक प्रदूषण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। बड़े शहरों में बेच रही उत्पाद बीना ने बताया कि उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया जब वह ‘ड्रीम स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ीं। पहले वह केवल घर पर सिलाई-बुनाई तक सीमित थीं, लेकिन अब वह अमरकंटक, भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे बड़े शहरों में अपने उत्पाद बेचती हैं। उनके समूह में शिक्षित और स्नातक महिलाएं भी शामिल हैं, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म से नए विचार सीखकर उत्पाद तैयार करती हैं। आर्थिक सशक्तिकरण और परिवार की स्थिति में सुधार वर्तमान में, बीना जायसवाल सालाना लगभग एक लाख रुपए का मुनाफा कमा रही हैं। इस आय से उनके बच्चों की शिक्षा बेहतर हुई और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। इस कार्य ने उन्हें आत्मसम्मान और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने का अवसर दिया है। यह है उत्पादों की कीमतें तीन सालों में 500 लोगों ने खरीदा तीन सालों में 500 से अधिक लोगों ने उनके उत्पाद खरीदे हैं। अमरकंटक, उमरिया और आसपास के अन्य जिलों में भी उनके करीब 200 ग्राहक हैं। बीना जायसवाल की मेहनत और रचनात्मकता ने उन्हें न केवल रोजगार दिया बल्कि महिला सशक्तिकरण और स्वच्छता के क्षेत्र में एक नई पहचान भी दिलाई है।


