दो महीने पहले एमएन इंस्टीटयूट से दीनदयाल सर्किल की ओर जाने वाली रोड को पूरी तरह खोद दिया और रास्ता बंद कर दिया। यहां सीवरेज का कुछ काम करना था। एक महीने तक खुदी रहने के बाद जब अतिरिक्त मुख्य अभियंता ने निरीक्षण किया तो फर्म ने 7 दिन में काम पूरा करने का वादा किया। फिर भी एक महीना और बीत गया मगर सड़क नहीं खुली। नतीजा, लोग चक्कर लगाकर करणीनगर से आ और जा रहे हैं। यही हालात अंबेडकर सर्किल के हैं। दीनदयाल सर्किल पर सीवरेज फर्म ने एक काम हाथ में लिया। सड़क खोदते वक्त दावा किया गया कि 10 िदन में काम पूरा हो जाएगा। फिर सड़क खोदी और एमएन अस्पताल की ओर से जाने वाली रोड बंद कर दी। एक महीने तक सड़क बंद रही। शिकायत पर अतिरिक्त मुख्य अभियंता ललित ओझा मौके पर पहुंचे। नाराजगी जताई और कहा, ये काम तो 10 दिन में होने वाला था। तब सीवरेज फर्म ने 7 दिन और मांगे मगर हैरानी की बात ये कि उस निरीक्षण के बाद भी एक महीना और बीत गया। मगर ना सड़क खुली ना सीवरेज का काम पूरा हुआ। नतीजा ये हुआ कि रोज यहां से गुजरने वाले करीब 10 हजार लोगों को चक्कर लगाकर दुर्गादास सर्किल या करणीसिंह स्टेडियम से होकर जाना पड़ रहा है। बात यहीं खत्म नहीं हुई। शहर के सबसे व्यस्त अंबेडकर सर्किल चौराहे के हाल इससे भी बुरे हैं। वहां निकलने का दूसरा विकल्प नहीं है मगर डेढ़ महीने से वहां भी एक रास्ता बंद है। अब खबर आ रही कि एक दिन के लिए पूरी सड़क ही बंद ही होगी। 10 दिन और संभव नहीं : फिलहाल रात का तापमान 5 डिग्री और दिन का 20 डिग्री। यानी औसत तापमान 12 से 13 डिग्री है। नियम है कि 10 डिग्री से नीचे के तापमान में डामर नहीं डाला जा सकता। इसलिए सब कुछ ठीक होने पर भी कम से कम 10 दिन तक तो सड़क और नहीं बनेगी। हालांकि बनने की संभावना तो अभी पूरे एक महीने तक नहीं है क्योंकि जो बीडीए 4 महीने में एक साइड की रोड बनाई वो दूसरी साइड की इतनी जल्दी बना देगा, इसकी संभावना कम है। दीनदयाल सर्किल और अंबेडकर सर्किल पर सीवरेज फर्म के काम से जनता बेहाल दीनदयाल सर्किल से करणीनगर की ओर जाने वाली एक तरफ की सड़क तो बीडीए ने बना दी मगर जिस ओर सीवरेज डाली गई उस ओर की सड़क टूटने के 10वें महीने में भी खुदी पड़ी है। यहां 800 मीटर सीवरेज डालने में फर्म ने पहले 7 महीने लगाए। फिर बीडीए ने बनाने में 4 महीने लगाने के बाद भी एक तरफ की सड़क ही नहीं बना पाई। वो भी तब जब संभागीय आयुक्त और कलेक्टर ने कई आदेश जारी किए मगर ये दोनों अधिकारी आदेश करके फॉलोअप लेना भूल गए। नतीजा, सड़क अब भी खुदी पड़ी है। अब अभियंता तर्क दे रहे कि सड़क के नीचे जगह-जगह होल आ रहे हैं। जैसे ही रोलर चलता है तो कहीं ना कहीं सड़क बैठ रही है। इसकी वजह पुरानी पानी की लाइन में लीकेज हुआ था या पुरानी सीवरेज लाइन के कारण सड़क बैठ रही। यही वजह है कि अब तक डामर जैसी स्थिति नहीं बन पाई।


