राजस्थान क्राइम फाइल पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि जयपुर-आगरा हाईवे पर पोल्ट्री फार्म के पास देर रात को 26 साल की युवती बेहोशी की हालत में निर्वस्त्र मिली थी। शरीर पर चोट के निशान थे। युवती ने पुलिस कॉन्स्टेबल सहित पांच लोगों पर गैंगरेप का मामला दर्ज कराया। अब पढ़िए आगे की कहानी… पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर युवती व आरोपियों की लोकेशन खंगाली। सभी की लोकेशन अलग-अलग जगह पर मिली। पुलिस इनकी मौजूदगी को वहां लगे सीसीटीवी फुटेज से प्रमाणित करने में जुट गई। पुलिस ने 5 में से 3 नामजद आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करना शुरू किया। कानोता इलाके में दर्ज गैंगरेप केस की जांच अभी चल रही थी। इसी बीच ज्योतिनगर पुलिस ने इसी युवती से रेप के पुराने मामले में 23 मई 2019 को आरोपी काॅन्स्टेबल को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने काॅन्स्टेबल को देर रात एलबीएस कॉलेज के पास से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद सामने आया कि इसी युवती ने कॉन्स्टेबल के खिलाफ पहले भी रेप व हत्या के प्रयास का मामला ज्योतिनगर पुलिस थाने में दर्ज करा रखा था। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश के लिए छापेमारी में जुट गई। इधर, हॉस्पिटल में भर्ती युवती की हालत में धीरे–धीरे सुधार हो रहा था। पुलिस ने युवती को फेंकने की जगह से लेकर आस–पास के इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया। पुलिस यहां मिले सबूतों की जांच में जुट गई। वो सच जो पुलिस जांच में सामने आया घटनास्थल व आरोपी के घर के आस–पास लगे सीसीटीवी कैमरों ने युवती की साजिश का पर्दाफाश कर दिया। 21 मई 2019 को रात 9 बजकर 10 मिनट पर युवती ने ओला कंपनी की बाइक लालकोठी से आगरा रोड जाने के लिए की थी। बाइक को पोल्ट्री फार्म पर इधर–उधर घुमाने के बाद युवती ने रास्ता भूलने की बात कही। उसने राइडर को वापस आगरा रोड पर छोड़ने को कहा। बाइक राइडर रात को 9 बजकर 50 मिनट पर युवती को छोड़कर चला गया। इसके बाद युवती चादर ओढ़े हुए पॉलीथिन लपेटे हुए आस–पास लगे कई सीसीटीवी कैमरों में घूमती हुई नजर आई। वह आरोपी युवक के घर के बाहर से भी कई बार निकली। इस दौरान युवती ने चेहरे पर पॉलीथिन पहन रखी थी और मुंह में सफेद कपड़ा डालकर टेप लगा रखी थी। जबकि रिपोर्ट के अनुसार युवती ने उस समय खुद को बेहोश बताया था। वारदात से पहले 3 बार आरोपी के घर गई थी युवती कॉल डिटेल और सीडीआर ने खोला राज युवती ने पुलिस को बताया था कि वो 21 मई 2019 को करीब सवा 9 बजे आरोपी युवक के घर पहुंची थी, जबकि उसकी लोकेशन इस समय उसके गर्ल्स हॉस्टल में थी। पुलिस ने आरोपियों की मोबाइल लोकेशन के साथ ही उनकी मौजूदगी की पुष्टि करने के लिए सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की। घटना के समय सभी आरोपी अलग–अलग जगहों पर मौजूद थे। इनकी लोकेशन सेठी कॉलोनी, बापू नगर, ओझाजी का बाग और भागीरथ नगर इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई थी। आरोपी काॅन्स्टेबल घटना के समय बापू नगर में जनता स्टोर के पास जूस पीकर अपने दोस्त के घर गया था। मेडिकल बोर्ड ने भी अपनी जांच में माना कि युवती के शरीर पर मिली चोटों के निशान सामान्य थे। कोई भी चोट जानलेवा या ऐसी नहीं थी जिससे बेहोशी आ सकती है। ब्लैकमेल नहीं कर सकी तो रची साजिश जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि युवती डेटिंग ऐप के जरिए कॉन्स्टेबल से मिली थी। इस बीच कॉन्स्टेबल ने कुछ समय बाद उससे बातचीत बंद कर दी। जिससे नाराज होकर उसने केस दर्ज कराया। पुलिस ने जांच के दौरान ज्योति नगर में दर्ज रेप केस के मामले में जेल में बंद कॉन्स्टेबल से भी पूछताछ की। कॉन्स्टेबल ने बताया कि युवती व उसकी मां शादी के लिए दबाव बना रही थी। शादी से इनकार करने पर युवती ने उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया था। ब्लैकमेल का भी असर नहीं हुआ तो युवती ने रेप केस दर्ज करा दिया। डॉक्टर ने दोस्ती से किया इनकार तो गैंगरेप में फंसाया इसी बीच पुलिस को पूछताछ में पता चला कि युवती 2018 में जब इलाज के दौरान एसएमएस हॉस्पिटल में भर्ती हुई तो युवती ने इलाज कर रहे डॉक्टर के मोबाइल नंबर ले लिए। कुछ दिनों तक इलाज के बहाने बात करने के बाद वह रोजाना कॉल करने लगी। इससे परेशान होकर उन्होंने युवती का नंबर ब्लॉक कर दिया। युवती ने 18 नवंबर 2018 को डॉक्टर के माता–पिता को उसका करियर खत्म करने की धमकी दी। डॉक्टर ने इस संबंध में 24 नवंबर 2018 को मोतीडूंगरी थाने में परिवाद दिया। इसी के चलते युवती ने गैंगरेप में डॉक्टर पर भी आरोप लगा दिए। वहीं गैंगरेप में एक युवक को केवल इसलिए आरोपी बनाया क्योंकि युवती को शक था कि वह पुलिस काॅन्स्टेबल की मदद कर रहा है। पिछले केस में कॉन्स्टेबल गिरफ्तार नहीं हुआ, इसलिए रची साजिश सीसीटीवी फुटेज, कैब ड्राइवर के बयानों और अन्य सबूताें के आधार पर अब तक ये बात साफ हो चुकी थी कि युवती के साथ गैंगरेप नहीं हुआ था। सारी साजिश उसने खुद रची थी। युवती ने बयान में कहा था कि आरोपियों ने उसका मोबाइल छीन लिया। जबकि हकीकत ये थी कि युवती ने वारदात से पहले ही अपना मोबाइल दोस्ताें की मदद से बहन के पास पहुंचा दिया था। पुलिस ने इसे युवती की बहन के पास से बरामद किया था। सच सामने आने के बाद केस की आईओ बस्सी एसीपी मनस्वी चौधरी ने युवती के बयान दर्ज किए। युवती ने बताया कि कुछ समय पहले भी उसने काॅन्स्टेबल के खिलाफ ज्योति नगर पुलिस थाने में रेप का केस दर्ज कराया था। उसमें कमी रहने के कारण पुलिस ने कॉन्स्टेबल को गिरफ्तार नहीं किया। इसी वजह से उसने गैंगरेप की कहानी रची ताकि कॉन्स्टेबल को फंसा सके। मामले में कोर्ट ने लिया प्रसंज्ञान इस चर्चित गैंगरेप केस को पुलिस ने जांच में झूठा पाया। इस कारण इसमें किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। कानोता गैंगरेप केस में एफआर लगने के बाद आरोपी काॅन्स्टेबल को ज्योति नगर थाने में दर्ज केस में हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। हालांकि इस केस में आरोपी काॅन्स्टेबल न तो बरी हुआ है और न ही पुलिस विभाग ने उसे बहाल किया है। कानोता पुलिस के अनुसार इस केस में पुलिस द्वारा लगाई गई एफआर पर कोर्ट ने प्रसंज्ञान लिया है। बस्सी के एमएन 15 नंबर कोर्ट के मजिस्ट्रेट पुलिस द्वारा लगाई एफआर की जांच कर रहे हैं। एफआर सही लगाई गई है या नहीं, इसकी जांच पूरी होने के बाद ही आगे कार्रवाई की जाएगी। मजिस्ट्रेट की जांच में केस झूठा पाया गया तो कोर्ट धारा 182 के तहत परिवादी के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दे सकता है। नियमानुसार अपने क्षेत्र के पुलिस थानों में दर्ज किसी भी केस व उनकी जांच पर लीगल मजिस्ट्रेट या अन्य सक्षम अधिकारी अपने स्तर पर जांच कर सकते हैं। 6 साल पहले हाईवे पर निर्वस्त्र मिली थी युवती:गैंगरेप का केस, मुंह पर पाॅलीथिन, शरीर में धंसे थे एलईडी बल्ब और इंजेक्शन, पार्ट-1


