सीहोर स्थित डॉ. आंबेडकर शासकीय महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के छात्रावास में रहने वाली छात्राएं लंबे समय से पेयजल संकट से जूझ रही हैं। छात्राओं का आरोप है कि उन्हें पीने के लिए गंदा पानी दिया जा रहा है और छात्रावास में लगा आरओ सिस्टम कनेक्शन के अभाव में बंद पड़ा है, जिससे उन्हें मजबूरी में दूषित पानी का उपयोग करना पड़ रहा है। छात्राओं की सेहत पर खतरा छात्राओं ने बताया कि छात्रावास की पानी की टंकी में भरा पानी इतना गंदा रहता है कि उसे पीने की इच्छा तक नहीं होती। इसके बावजूद छात्राओं के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। गंदे पानी के कारण बीमार पड़ने का डर भी बना हुआ है। आरओ लगा, लेकिन कनेक्शन नहीं छात्रा अनामिका ने बताया कि छात्रावास में आरओ मशीन तो लगाई गई है, लेकिन उसका कनेक्शन नहीं किया गया है। इस वजह से आरओ केवल शोपीस बनकर रह गया है और छात्राओं को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। छात्राओं ने इस समस्या को लेकर कई बार प्राचार्य और वार्डन को मौखिक और लिखित रूप से अवगत कराया, लेकिन इसके बावजूद न तो पानी की सफाई की गई और न ही आरओ को चालू किया गया। जिला प्रशासन को सौंपा ज्ञापन परेशान छात्राओं ने अपनी पेयजल समस्या को लेकर जिला प्रशासन को भी ज्ञापन सौंपा था। छात्राओं को उम्मीद थी कि प्रशासन स्तर पर कार्रवाई होगी, लेकिन वहां से भी अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। लगातार अनदेखी से छात्राओं में नाराजगी बढ़ती गई। साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधा न मिलने को लेकर छात्राएं खुद को असुरक्षित और उपेक्षित महसूस करने लगीं। एबीवीपी ने किया प्रदर्शन छात्राओं की समस्या के समर्थन में शुक्रवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कॉलेज और छात्रावास के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए जल्द समाधान की मांग की। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि छात्राओं की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। संगठन ने प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई करने और पेयजल व्यवस्था तुरंत दुरुस्त करने की मांग की। संस्थान प्रशासन का पक्ष संस्थान के राजेश कुमार ने बताया कि छात्राओं द्वारा जानकारी दिए जाने के बाद आरओ की व्यवस्था कर दी गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें संस्थान में आए हुए बहुत कम समय हुआ है और वे व्यवस्थाओं को सुधारने का प्रयास कर रहे हैं।हालांकि प्रशासन के आश्वासन के बावजूद छात्राएं अब भी स्थायी समाधान का इंतजार कर रही हैं। छात्राओं का कहना है कि जब तक उन्हें नियमित रूप से साफ और सुरक्षित पेयजल नहीं मिलेगा, तब तक उनकी परेशानी खत्म नहीं होगी।


