जिले में गर्मी के बढ़ते ही ग्रामीण इलाकों में पेयजल की समस्या बढ़ने लगी है। पानी की समस्या दूर करने करोड़ों रुपए खर्च कर गांवों में शुरू किया गया जल जीवन मिशन फेल दिखने लगी है। 3 से 4 साल बाद भी मिशन के तहत जिले में काम ही पूरे नहीं हो सके हैं। कहीं पानी टंकी अधूरी है तो कहीं घरों के सामने बने स्टैंड पोस्ट अब क्षतिग्रस्त हो गए हैं। जल जीवन मिशन के तहत पेयजल भले ही लोगों के घर तक नहीं पहुंचा है, लेकिन हर घर के सामने स्टैंड पोस्ट बना दिए गए हैं, जिसमें से पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी। ऐसे में इस पक्के चबूतरे का उपयोग ग्रामीण महुआ, इमली व अमचूर सुखाने कर रहे हैं। कार्यों को मार्च 2024 तक पूरे किए जाने थे। मियाद पूरी हुए एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन सुकमा में अब भी योजना अधूरी पड़ी हुई है। छिंदगढ़ के पांडूपारा में पानी टंकी का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है। जल्द पूरे किए जाएं सभी कार्य: पीएचई के ईई विनोद कुमार राम ने बताया कि कार्यों को पूरे करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। छिंदगढ़ ब्लॉक की कई पंचायतों में बोर फेल हो गए, पानी की सप्लाई नहीं हो पाई है। छिंदगढ़ ब्लॉक के कुंदनपाल पंचायत के पांडूपारा में 91 घरों के सामने स्टैंडपोस्ट तो बना दिए गए और नलों को पाइपलाइन से भी जोड़ दिया गया, लेकिन टंकी का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है। छिंदगढ़ ब्लॉक के टांगररास में अफसर व ठेकेदारों ने पंचायत के बड़े गुरबे के तहत स्कूलपारा और पटेलपारा में केवल स्टैंड पोस्ट बनाए गए, यहां न पाइपलाइन बिछाई गई है और न ही टंकी। 30% ही काम : जिले के 160 पंचायतों के 435 गांवों में पेयजल आपूर्ति दी जानी थी। 2021 में शुरू हुए काम 4 साल बाद भी पूरे नहीं हो सके हैं। बीते 4 सालों में केवल 30 फीसदी काम ही पूरे हो पाए हैं। सुकमा। ग्रामीण अब अमचूर सुखाने स्टैंड पोस्ट का उपयोग कर रहे। छिंदगढ़ ब्लॉक के पेंदलनार पंचायत के मूठेली गांव के 51 घरों के सामने दो साल पहले स्टैंड पोस्ट बनाए गए और पानी टंकी के लिए गड्ढा खोदा गया, लेकिन काम आज तक शुरू ही नहीं हुआ। ग्रामीणों को गांव के स्कूल से पेयजल की व्यवस्था करनी पड़ रही है। पानी की किल्लत की समस्या से अवगत करा चुके हैं। पेयजल समस्या से निपटने जिले में चल रहे कार्य अपने तय समय से काफी पीछे चल रहे हैं। अफसरों की लेटलतीफी के कारण ग्रामीणों को योजना का फायदा ही नहीं मिल पा रहा है। जिले में कुल 219 पानी टंकियों के निर्माण को मंजूरी मिली थी। इसमें से केवल 98 टंकियों का निर्माण ही किया जा सका है। जबकि 19 टंकियां ऐसी हैं, जिनके काम ही शुरू नहीं हो पाए हैं।


