उदयपुर की मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में लंबे समय बाद बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (BOM) को फिर से सक्रिय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी और गोगुंदा विधायक प्रतापलाल भील को बॉम का सदस्य मनोनीत किया है। उच्च शिक्षा विभाग ने शुक्रवार शाम को इसके आदेश जारी किए। अब यूनिवर्सिटी प्रशासन में लंबे समय से अटके कामों को गति मिलने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि जनप्रतिनिधियों की पुन: नियुक्ति के बाद अब बॉम की बैठकें नियमित रूप से हो सकेंगी। इससे कई नीतिगत फैसले आगे बढ़ पाएंगे। बता दे कि इससे पहले भी ये दोनों बीजेपी विधायक सुखाड़िया विश्वविद्यालय के बॉम में सदस्य रह चुके हैं। विश्वविद्यालय प्रशासनिक व्यवस्था पर शोध कर चुके डॉ. भूपेंद्र आर्य का कहना है कि बॉम में विधायकों की मौजूदगी बेहद अहम होती है। क्षेत्र और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों की दृष्टि और समझ प्रशासनिक फैसलों को मजबूत आधार देती है। यही कारण है कि विश्वविद्यालयों में बॉम का पूर्ण होना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए जरूरी माना जाता है। बॉम की संरचना और भूमिका
कुलपति बॉम के अध्यक्ष होते हैं। उनके साथ दो वरिष्ठ प्रोफेसर, संघटक कॉलेजों के दो अधिष्ठाता (डीन), संबद्ध कॉलेजों के प्राचार्य, वित्त विभाग का प्रतिनिधि और उदयपुर क्षेत्र के दो विधायक सदस्य होते हैं। यह संस्था प्रशासनिक, शैक्षणिक, वित्तीय और नीतिगत फैसलों की सर्वोच्च इकाई है। विश्वविद्यालय के अधिकांश बड़े निर्णय बॉम की मंजूरी से ही लागू होते हैं। नियम के मुताबिक हर छह महीने में बॉम की बैठक होनी चाहिए, लेकिन लंबे समय से सदस्यों की कमी और विवादों के कारण कई बैठकें प्रभावित हुईं। सदस्यों के बढ़ने पर क्या बदलेगा
विश्वविद्यालय में 2018 के बाद से भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक पदों पर नियुक्तियां अटकी हुई हैं। सीएएस के तहत प्रोफेसरों और असिस्टेंट प्रोफेसरों के प्रमोशन भी लंबित हैं। बॉम के पूर्ण होने के बाद इन मामलों में तेजी आने की उम्मीद है। पिछले पांच सालों में बॉम की बैठकों के दौरान दो कुलपतियों के कार्यकाल को लेकर विवाद भी सामने आए थे। अब कार्यवाहक कुलपति के नेतृत्व में व्यवस्था पटरी पर लौटने की संभावना जताई जा रही है।


