दशकों के इंतजार के बाद सुजान गंगा नहर से ओवरफ्लो पानी को निकाले जाने के प्रोजेक्ट पर काम प्रारंभ हो गया है। इसके लिए सरकार ने 1.75 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं, जिसमें सहयोग नगर और पाईबाग पर आउटलेट्स को पुनर्जीवित किया जाएगा। ये दोनों स्थान रियासत कालीन सिस्टम से जुड़े हुए हैं। यहां गेट बनाए जाएंगे और एक बाई एक मीटर के सीमेंटेड बॉक्सों की लाइन डाली जाएगी। नहर के पानी को सीएफसीडी में डाला जाएगा। इस संबंध में टेंडर के वर्क ऑर्डर जारी हो गए हैं। डेडलाइन जुलाई 2026 तक है, लेकिन जलसंसाधन विभाग के एसई बनय सिंह का दावा है कि मार्च तक काम पूरा कर लिया जाएगा। फिलहाल यूटिलिटी से जुड़ी चीजों को हटाने का काम चल रहा है। दोनों स्थानों यानी निकासी स्थल और सीएफसीडी का बैड लेवल ले लिया गया है, जिसमें माना गया है कि पानी का प्राकृतिक प्रवाह रहेगा। प्रोजेक्ट के तहत सहयोग नगर में करीब 100 मीटर बॉक्स लाइन डाली जाएगी। पानी केतन गेट क्षेत्र में सीएफसीडी में डाला जाएगा। इसके अलावा पाईबाग क्षेत्र में चांदपोल गेट तक करीब 450 मीटर बॉक्स लाइन डलेगी। इस लाइन को चांदपोल गेट के सहारे जा रही सीएफसीडी में डाला जाएगा। क्यों जरूरी… टीडीएस 2186, मानक से चार गुना अधिक, जहरीली गैस का खतरा सुजान गंगा नहर की पानी निकासी व्यवस्था दशकों से डैमेज है। नहर में पानी बरसों से जमा है और प्रदूषित हो रहा है। इसलिए नहर के पानी का टीडीएस पिछले दिनों 2186 पहुंच गया, जो मानक से चार गुना से भी अधिक है। ऐसे में पानी में ऑक्सीजन की मात्रा घटने, हैवी मेटल जमा होने से जहरीली गैस बनने का खतरा बन सकता है। जलीय जीवों और आसपास के निवासियों के लिए यह स्थिति खतरनाक हो सकती है। इसके अलावा पिछले तीन साल से मानसून में सुजान गंगा नहर का पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बहा, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ और सड़कों का भी नुकसान हुआ। ऐतिहासिक महत्व: 8 साल में 1741 में बनी थी नहर महाराजा सूरजमल ने लोहागढ़ किले की सुरक्षा के लिए 1733 में सुजान गंगा नहर का निर्माण शुरू कराया था। यह 8 साल में बनकर तैयार हुई। इसमें 650 कारीगरों ने रात-दिन काम किया। नहर 2.4 वर्ग किलोमीटर में फैले किले के चारों ओर करीब 2.9 किलोमीटर लंबी है। आगे क्या: डूंगरी बांध से लाएंगे फ्रेश वाटर राज्य सरकार के बजट में सुजान गंगा में पानी लाने के लिए प्रावधान किया है। इसमें डूंगरी बांध से बांध बारैठा होते हुए सुजान गंगा नहर को लिंक किया जाएगा। रियासतकाल में पानी अजान बांध से रामनगर दोमोरा होते हुए घोड़ा घाट पर नहर में गिरता था। हर साल नहर फ्रेश पानी से रिचार्ज होती थी।


