सुपरवाइजर बोला-गुस्से में आकर पार्षद पर लगाया था आरोप:कर्मचारियों ने किया था प्रदर्शन, पार्षद ने कहा-150 रुपए के काम के लिए 2 महीने इंतजार

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में भाजपा पार्षद और PWD सुपरवाइजर के बीच विवाद का मामला और भी गरमा गया। आज शनिवार को भाजपा पार्षद नगर निगम के अंदर आमरण अनशन पर बैठ गए। उन्होंने कोमल सार्वा पर लगे आरोपों को निराधार बताया। जबकि सुपरवाइजर ने भी गुस्से में आकर पार्षद पर आरोप की बात स्वीकार की है। दरअसल, शुक्रवार दोपहर ब्राह्मण पारा वार्ड में रिपेयरिंग काम को लेकर भाजपा पार्षद कोमल सार्वा और पीडब्ल्यूडी सुपरवाइजर रामनारायण माहेश्वरी के बीच विवाद हो गया था। सुपरवाइजर ने पार्षद पर गाली-गलौज और मारपीट का आरोप लगाया था। जिसके बाद कर्मचारियों ने पार्षद से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की बात कही थी। ऐसा नहीं करने पर उन्होंने धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। भाजपा पार्षद नगर निगम के अंदर आमरण पर बैठे शनिवार सुबह कर्मचारियों के धरने में बैठने से पहले भाजपा पार्षद नगर निगम के अंदर आमरण पर बैठ गए। इसके बाद कर्मचारियों को महापौर के साथ बैठक करनी पड़ी। घंटों महापौर के साथ बैठक हुआ। इधर, आमरण अनशन पर पार्षद कोमल सार्वा से पीडब्ल्यूडी सभापति और पार्षद नरेंद्र रोहरा बातचीत करने पहुंचे। कोमल सार्वा महापौर के चेंबर में पहुंचे, तब जाकर मामला शांत हुआ। पार्षद ने आरोपों को बताया निराधार पार्षद कोमल सार्वा ने बताया कि उनके ऊपर आरोप लगा है कि निगम के अंदर जाकर कर्मचारी के साथ गाली-गलौज और मारपीट किया गया है। जो कि बिल्कुल निराधार है। शुक्रवार को घटना होने के बाद कर्मचारी और वार्डवासी शिकायतकर्ता के साथ एक चेंबर में बैठकर मामले को सुलझा लिया गया था और कहा गया था कि कल आपके वार्ड में काम लगेगा। 150 रुपए के काम को लेकर 2 महीने का इंतजार पार्षद ने कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कर्मचारियों का खुद विरोधी व्यक्ति है। इस संबंध में महापौर के पास भी पहुंचे हुए थे। उन्होंने बताया कि न अभद्र भाषा का प्रयोग और न ही मारपीट की गई है। पार्षद का कहना है कि 150 रुपए के काम को लेकर 2 महीने का इंतजार करना पड़ा। सुपरवाइजर ने शिकायत वापस लिया पीडब्ल्यूडी के सुपरवाइजर रामनारायण महेश्वरी ने बताया कि वह आक्रोश में आकर पार्षद पर आरोप लगाए थे कि भाजपा पार्षद ने गाली-गलौज और मारपीट की है। ऐसा कुछ नहीं हुआ था। कर्मचारी ने बताया कि वह आक्रोश में आकर ऐसा बोल गए थे। कर्मचारी ने अपनी गलती को एहसास भी किया। उन्होंने कहा कि मीडिया को गलत जानकारी दिए थे। ऐसे में उन्होंने शिकायत वापस ले लिया है।

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