जांजगीर | ग्राम चिस्दा (थाना हसौद, जिला सक्ती) निवासी फिरूराम साहू को सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के आरोप से बरी कर दिया। उन पर भाई की पत्नी की हत्या का आरोप था। इस पर जुलाई 2023 में सक्ती की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद साहू परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में न्याय की गुहार लगाई। इस संघर्ष में बिलासपुर के वकील शिवांक मिश्रा ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने केस की बारीकियों को गहराई से समझते हुए सुप्रीम कोर्ट में यह साबित किया कि फिरूराम साहू को गलत तरीके से दोषी ठहराया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि फिरूराम साहू के खिलाफ हत्या का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है और उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।


