सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बावजूद जोधपुर में CETP स्टील से ही बिना ट्रीटमेंट वाला दूषित पानी छोड़ा जा रहा है। यह खुलासा हुआ है राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) की छापेमारी में। लूणी-जोजरी नदी को प्रदूषित करने वाले उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई का अभियान चला रही पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड की टीम ने बुधवार सुबह सांगरिया स्थित CETP स्टील पर छापेमारी की। इस मामले में अब फैक्ट्री को बंद कराने और भारी एन्वायरमेंटल कंपनसेशन (EC) वसूलने की तैयारी शुरू कर दी गई है। दरअसल, बुधवार सुबह RSPCB की टीम ने शिकायतों के सत्यापन के लिए सांगरिया इंडस्ट्रियल एरिया स्थित CETP स्टील पर छापा मारा। मौके पर पाया गया कि प्लांट से बिना ट्रीट किया हुआ (untreated) काला पानी चोरी-छिपे CETP टेक्सटाइल के आउटलेट में छोड़ा जा रहा था। यह पानी आगे जाकर रीको (RIICO) ड्रेन में मिल रहा था और अंततः जोजरी नदी में गिर रहा था, जिससे नदी का प्रदूषण स्तर खतरनाक रूप से बढ़ रहा है। NGT के आदेशों की खुली अवहेलना RSPCB जोधपुर की क्षेत्रीय अधिकारी कामिनी सोनगरा ने बताया कि यह कृत्य न केवल बोर्ड द्वारा जारी कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) की शर्तों का उल्लंघन है, बल्कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेशों की भी सीधी अवहेलना है। NGT ने किसी भी हालत में बिना ट्रीट किए हुए एफ्लुएंट को खुले में छोड़ने पर सख्त पाबंदी लगा रखी है। इसके बावजूद फैक्ट्री प्रबंधन नियमों को ताक पर रखकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा था। ZLD सिस्टम का पालन नहीं सोनगरा ने जानकारी दी कि बोर्ड ने 21 अप्रैल 2023 को जारी CTO में शर्त 23, 36, 37 और 38 के तहत इकाई को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) सिस्टम बनाए रखने के निर्देश दिए थे। इसका मतलब है कि फैक्ट्री से एक बूंद भी पानी बाहर नहीं जाना चाहिए था। इसके अलावा, 21 फरवरी 2025 के आदेश के मुताबिक, ट्रीटेड पानी का उपयोग भी केवल सदस्य इकाइयों में दोबारा इस्तेमाल के लिए ही किया जाना था। अब होगी ये तीन बड़ी कार्रवाई: अवैध रूप से पानी छोड़ने के मामले में बोर्ड ने अब कठोर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है: भारी जुर्माना: फैक्टरी पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) के तहत लाखों रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। क्लोजर की कार्रवाई: पर्यावरणीय कानूनों के उल्लंघन के चलते CETP स्टील को बंद (Close) कराने की कार्रवाई की जा रही है। कानूनी कार्रवाई: प्रबंधन के खिलाफ कोर्ट में परिवाद (Prosecution) दायर कर कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जाएगी।


