कृष्ण कांत सिंह | हजारीबाग हजारीबाग झील में बापू मूर्ति के पीछे अंग्रेज जमाने के कुछ छोटे-छोटे मकान बने हुए हैं। इसमें कुछ कुछ खंडहर नुमा थे। कभी यही जगह दुराचार का अड्डा हुआ करता था। जुआ, ताश नशाखोरी करने वालों का यह अड्डा था। लेकिन आज यहां भागवत पुराण और भागवत कथा का वचन होता है। सुबह और शाम हरे कृष्ण हरे रामा के संकीर्तन से गूंजता रहता है। सुबह और शाम आरती होती है। यहां संघ कीर्तन के साथ-साथ युवाओं के मार्गदर्शन के लिए साप्ताहिक कार्यक्रम का भी आयोजन होता है। बता दें की प्रत्येक रविवार को साप्ताहिक सत्संग में शहर के सैकड़ों लोग यहां आते है। हजारीबाग का यह हरे कृष्णा केंद्र आज एक भव्य आध्यात्मिक केंद्र का रूप लेता जा रहा है। पिछले तीन वर्षों से इस खंडहरनुमा जगह को गौरांग सेवा संस्थान के सेवार्थियों ने एक आध्यात्मिक केंद्र में तब्दील कर दिया है। कभी यही जगह पूरे क्षेत्र में जहां नकारात्मक ऊर्जा का संचार करता था ,आज यही जगह अपने आध्यात्मिक के लिए जाना जाता है। लोग यहाँ आते हैं और सुकून और आध्यात्मिक पल बिता कर वापस जाते हैं। इस संबंध में उत्तान पाद दास ने कहा की रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी हरे कृष्णा केंद्र में आने की सहमति जताई है। इसी सप्ताह यहां आ सकते हैं। इधर जीएसए के संस्थापक श्याम ब्रज विलास दास ने जानकारी देते हुए कहा की भक्ति में इतनी शक्ति होती है कि बंजर भूमि को भी उपजाऊ बना देती है। यहां स्थापित यह हरे कृष्णा केंद्र इसका जीता जागता उदाहरण है। उन्होंने गौर निताई भगवान के संबंध में जानकारी देते हुए कहा की गौर निताई, भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु और भगवान नित्यानंद के नाम से जाने जाते हैं। इन्हें गौरांग और नित्यानंद के नाम से भी जाना जाता है। गौरांग का मतलब है सुनहरे रंग के शारीरिक रंग वाला” और नित्यानंद का मतलब है “वह जो शाश्वत आनंद का प्रतीक है। कहा कलियुग में भगवान कृष्ण इस भौतिक संसार में भगवान चैतन्य महाप्रभु के रूप में प्रकट होते हैं, जबकि बलराम भगवान नित्यानंद के रूप में प्रकट होते हैं।


