किरनापुर क्षेत्र के घने जंगलों में चल रही संयुक्त तलाशी के दौरान सुरक्षा बलों ने नक्सलियों की बड़ी तैयारी को नाकाम कर दिया। सिरका-मोजाडेरा और अलीटोला के जंगल में जमीन के भीतर छिपाए गए दो बड़े भंडार मिले हैं। इनमें विस्फोटक, गोली-बारूद, लांचर सेल, वायरलेस, रेडियो, मोबाइल, दवाएं, इंजेक्शन, अनाज और नक्सली साहित्य का जखीरा मिला है। हॉकफोर्स, जिला पुलिस, केन्द्रीय बल और बीडीडीएस टीम कई दिनों से जंगल में सर्चिंग कर रही थी। डॉग स्क्वॉड ने पेड़ों और चट्टानों के बीच छिपे उन स्थानों को खोजा, जहां नक्सलियों ने गुप्त कोठियां बनाई थीं। नक्सली यहां औजार और उन्य उपकरण जमा कर रहे थे। दबाव में स्थायी ठिकाने छोड़े बैहर एएसपी आदर्श कांत शुक्ला का कहना है कि जिले के जंगलों में लगातार दबिश बढ़ने से नक्सली अपने स्थायी ठिकाने छोड़ने को मजबूर हुए हैं। हाल के सप्ताहों में कई नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिससे अभियान का प्रभाव और दिख रहा है। बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। रिजर्व बेस जोन रहा है
बालाघाट में 3 राज्यों की सीमाएं हैं। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली और छत्तीसगढ़ का रावघाट व अंतागढ़ बेल्ट से जुड़ा है। ये दोनों पूरे देश के कोर नक्सली जोन हैं। जब महाराष्ट्र में पुलिस/सी60 कमांडो का दबाव बढ़ता है तो कई नक्सली दल बालाघाट को बैकअप बेस जोन के रूप में इस्तेमाल करते हैं।


