भास्कर न्यूज | अमृतसर श्री लक्ष्मी नारायण राग सभा सोसायटी द्वारा श्री दुर्ग्याणा कमेटी के सहयोग से 121वें वार्षिक संगीत सम्मेलन का शुभारंभ रविवार को वेद कथा भवन, दुर्ग्याणा मंदिर परिसर में किया गया। 1 से 4 मार्च तक चलने वाले इस प्रतिष्ठित समागम का उद्घाटन सोसायटी के चेयरमैन सुदर्शन कपूर और प्रधान एडवोकेट सुधीर मेहरा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उनके साथ सोसायटी के कार्यकारिणी सदस्य एसके वधवा, प्रैस सचिव सुरिंदर दुग्गल, लाजपत राय खन्ना , प्रिंसिपल पुष्पिंदर वालिया भी थे।कार्यक्रम का आरंभ बीबीके डीएवी कॉलेज की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ, जिसकी मधुर ध्वनि ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। इसके पश्चात उद्योगपति महेश सागर ने ‘अछूतम केशवम् कृष्ण दामोदरम, रामनारायण जानकी वल्लभ’ जैसे भजनों के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण की महिमा का गुणगान किया। राधा-कृष्ण के स्वरूप में सजे नन्हे बच्चों के मनमोहक नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया। स्थानीय युवा कलाकारों ने शास्त्रीय गायन और वादन पेश कर अपनी कला के प्रति आस्था प्रकट की। इस अवसर पर विख्यात तबला वादक मास्टर काले राम विशेष रूप से उपस्थित रहे। उक्त राग संगीत सभा में पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल के प्रधान प्यारे लाल सेठ, एसके वधवा, राकेश ठुकराल इत्यादि मौजूद थे। सम्मेलन का आगाज पिछले 121 बरसों से निरंतर किया जा रहा है। श्री लक्ष्मी नारायण राग सभा सोसायटी की स्थापना साल 1905 में स्व. गुरसहाय मल जी कपूर द्वारा की गई थी। कपूर का जन्म 1866 में हुआ था। कपूर के नेतृत्व में साल 1935 तक उक्त राग सभा फलती फूलती रही थी। कपूर के 1935 में निधन के बाद उनके भतीजे लाला मदन लाल कपूर ने सालाना राग सभी को जारी रखने का दायित्व उठाया। उन्होंने किशन चंद सहदेव, चेला राम, सोमनाथ, किशन चंद सचदेवा, किशन चंद खन्ना, वासुदेव हांडा, सोहन लाल हांडा, बलदेव रहराज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हर साल राग सभा का आयोजन जारी रखा। साल 1973 तक राग सभा मदन लाल कपूर के नेतृत्व में आयोजित की जाने लगी। उनके निधन के बाद उनके बेटे दीना नाथ कपूर, राम लुभाया कपूर ने इसकी कमान अपने हाथों में ली। साल 2012 में राम लुभाया कपूर के निधन के बाद लाजपत राय कना के मजबूत कंधों पर राग सभा के आयोजन का दायित्व आन पड़ा। साल 2005 में इसके 100 साल पूरे होने के बाद इसे बंद करने का मन बनाया गया, लेकिन सुदर्शन कपूर ने इसे बंद करने से रोकने के लिए इसका पुनर्गठन का फैसला लिया तथा अभी तक उक्त राग सभा सोसायटी की तरफ से सम्मेलन का सिलसिला निरंतर जारी है। राधा कृष्ण की वेशभूषा में सजे बच्चे ।


