जिला स्वास्थ्य विभाग की क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट शाखा के लापरवाह अधिकारियों के संरक्षण में शहरी क्षेत्र में कई नर्सिंग होम ऐसे चल रहे हैं, जिनमें सुविधाएं सिर्फ कागजों में मौजूद हैं। साइन बोर्डों पर बड़ी-बड़ी सुविधाएं होने का दावा लिखकर इन नर्सिंग होम के संचालकों द्वारा मरीजों काे ठगा जा रहा है। मरीज के गंभीर हालत में पहुंचने पर सरकारी या निजी अस्पतालों में रैफर किया जा रहा है। ऐसे ही अस्पतालों में से एक श्री अरविंद नर्सिंग होम है। इसके संचालक द्वारा अस्पताल में लकवा, पॉइजनिंग के इलाज और हृदय रोग यूनिट होने का दावा किया जा रहा है। अस्पताल की जमीनी हकीकत यह है कि यहां डॉक्टर तो दूर नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ तक का टोटा है। जानकारों के अनुसार अस्पताल में गिनती का एक डॉक्टर और तीन कर्मचारियों का स्टाफ है। इनमें एक मैनेजर और दो अन्य कर्मचारी हैं, जिनके भरोसे अस्पताल में मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। लेकिन नाक के नीचे चल रहे यह नर्सिंग होम जिला स्वास्थ्य विभाग को नजर नहीं आ रहे हैं। बिना सुविधा नर्सिंग होम का संचालन करने का कारण पूछने पर संचालक डॉ. देवेंद्र अहिरवार ने जवाब देने से इंकार कर दिया। इमरजेंसी मरीजों के लिए कोई सुविधा नहीं अस्पताल में गंभीर हालत में आने वाले मरीजों के लिए न तो डि-फेब्रीलेटर है और न ही वेंटीलेटर की व्यवस्था है। इसके अलावा आपातकाल में उपयोग होने वाली एमरजेंसी ट्रे तक नहीं है। जबकि किसी भी अस्पताल की हृदय रोग यूनिट में हार्ट मॉनिटर, आर्टिफिशियल वेंटिलेटर, कार्डियक टेलीमेट्री, स्पेशल केयर यूनिट, स्टेप-डाउन यूनिट (इंटरमीडिएट केयर यूनिट) होना जरूरी है। इसके अलावा हृदय रोग यूनिट में मरीजों की देखभाल के लिए 24 घंटे चिकित्सक, नर्स, सामाजिक कार्यकर्ता और आहार विशेषज्ञ होना चाहिए। इन कर्मचारियों का काम मरीजों की देखभाल के साथ-साथ उनके परिवार की सहायता करना भी होता है।


