मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के नए कुलगुरु की खोजबीन के सर्च कमेटी की प्रक्रिया एक माह से अटकी है। इससे सुविवि में पिछले पांच सालों से लंबित चल रही टीचिंग के 25 व नॉन टीचिंग के 58 पदों सहित कुल 83 पदों पर होने वाली भर्ती प्रक्रिया फिर अटक गई है।
काम चलाऊ व्यवस्था के तहत तैनात कार्यवाहक कुलगुरु प्रो. बीपी सारस्वत के पास इन पदों पर भर्ती का अधिकार नहीं है। ऐसे में इन 83 पदों पर भर्तियां नए कुलगुरु के नेतृत्व में अप्रैल के बाद ही संभव है। सुविवि को नए कुलगुरु मार्च से पहले मिलते दिखाई नहीं दे रहे हैं। सुविवि की गत 9 दिसंबर को हुई बॉम बैठक में सर्च कमेटी के प्रतिनिधियों का नाम सर्वसम्मति से राज्यपाल को भेज दिया था। लेकिन, अभी तक न राज्यपाल बागड़े की ओर से नामों की घोषणा की गई, न प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने यूजीसी नॉमिनी की घोषणा की। ऐसे में गत 23 दिसंबर 2025 से कार्यवाहक कुलगुरुओं के भरोसे चल रही शिक्षा व्यवस्था अब मार्च तक ऐसे ही चलेगी। अगर सर्च कमेटी का गठन इसी माह कर भी दिया जाए तो कुलगुरु पद के लिए शिक्षाविदों के आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। आवेदनों की छंटनी के बाद राज्यपाल बागड़े व सीएम भजनलाल शर्मा की सहमति से एक शिक्षाविद् को कुलगुरु नियुक्त किया जाएगा। ये नियम बन रहे बाधा… कार्यवाहक कुलगुरु न भर्ती करा सकते हैं, न ही नीतिगत निर्णय ले सकते राजभवन व प्रदेश सरकार के गत 19 जून 2018 को जारी नियमों के मुताबिक राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालयों में टीचिंग व नॉन टीचिंग पदों पर भर्तियां स्थायी कुलपति (कुलगुरु) ही कर सकते हैं। इसमें भी शर्त यह है कि स्थायी कुलगुरु भी अपने कार्यकाल के आखिरी 3 माह में न कोई भर्ती कर सकेंगे, न ही नीतिगत निर्णय ले सकेंगे। ऐसे में कार्यवाहक कुलगुरु भी भर्तियां नहीं करा सकेंगे, न ही नीतिगत निर्णय ले सकेंगे। दूसरी ओर, भर्तियों का रोस्टर बनकर तैयार है। कार्यवाहक कुलगुरु प्रो. बीपी सारस्वत ने भी कहा कि वे बतौर कार्यवाहक कुलगुरु सुविवि में भर्तियां नहीं करा सकते हैं। प्रदेश सरकार विशेष नियमों के तहत पहल करे तो कुछ हो सकता है, जिसकी संभावना दूर तक दिखाई नहीं दे रही है।


