सुहागिन महिलाओं ने पीपल के वृक्ष की पूजा की:सोमवती अमावस्या के मौके पर पति की लंबी उम्र के लिए की कामना

अस्पताल रोड पर पूर्व नरेश की कोठी झालावाड़ में सोमवती अमावस्या के मौके पर सुहागिन महिलाओं ने पीपल के वृक्ष की पूजा कर अपने पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। महिलाओं ने पीपल के वृक्ष के समक्ष परिक्रमा की और रक्षा सूत्र लपेटकर पति की दीर्घायु की कामना की। इस अवसर पर सोमवार सुबह से ही महिलाएं स्नान करने के बाद पूजन का समान लेकर पीपल वृक्ष का पूजन करने पहुंचने लगी। साथ ही व्रती महिलाओं ने पीपल वृक्ष की गंगाजल, फूल, प्रसाद अर्पित कर सौभाग्यवती एवं धन धान्य की मन्नत मांगी। पूजन के दौरान सुहागिन महिलाओं ने पीपल पेड़ की 108 बार परिक्रमा करते हुए प्रत्येक परिक्रमा के दौरान कच्चे धागे, प्रसाद, तिल, जौ, सिंदूर एवं फूल डालते हुए पूजन किया। नयागांव से झालावाड़ रह रहे पंडित दिनेश शर्मा ने बताया कि इस सोमवती अमावस्या पर वृद्धि योग बन रहा है, जो शुभ कार्यों और साधना के लिए अनुकूल है। वहीं, मूल नक्षत्र इस दिन को और भी पवित्र बनाता है। इस संयोग में किए गए धार्मिक कार्य और पूजा अत्यधिक फलदायी होते हैं। यह योग धन-धान्य, समृद्धि और परिवार के कल्याण के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। सरोज राजावत ने बताया कि पीपल वृक्ष की पूजा सुहागिन महिलाएं प्राचीन काल से करती आ रही है। धार्मिक कथाओं में भी वर्णित है कि सोना धोबिन एक सुहागिन महिला थी। जब उसके पति की मृत्यु हो गई तो उन्होंने अपने पति को जीवित करने के लिए पीपल पेड़ की पूजा अर्चना की थी। शशि सिंह शेखावत ने बताया सोमवती अमावस्या व्रत को शास्त्रों में अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत भी कहा जाता है। अश्वत्थ का अर्थ है, पीपल का पेड़। पीपल के पेड़ पर भगवान विष्णु का वास होता है। इसलिए सोमवती अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की भी पूजा का विधान है। सोमवती अमावस्या के अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदियों में स्नान और तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। पूजा जाट ने कहा सोमवती अमावस्या विशेष रूप से सुख, शांति और समृद्धि प्राप्ति के लिए अच्छा माना जाता है। पुण्यदायी और जीवनदायी मानी जाती है
​​​​मनभरत नागर ‌ने कहा सोमवती अमावस्या व्यक्ति के लिए पुण्यदायी और जीवनदायी मानी जाती है। अनुसूया शर्मा ने बताया सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना बहुत शुभ होता है, क्योंकि यह दिन भगवान शिव को समर्पित है। संतोष कंवर ने कहा आज के दिन कोई अपने पितरों की कामना करते हुए किसी भी प्रकार से 108 परिक्रमा कर ले, तो यह निश्चित समझिए कि व्यक्ति का कितना भी कठिनाई पूर्ण जीवन सुधर जाता है और व्यक्ति की मनोकामना इच्छित कामना पूर्ण हो जाती है।

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