सूफी संत शेख बाबा फरीद ने भी 40 दिनों तक यहां की थी भक्ति

भास्कर न्यूज | जालंधर शहर की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक इमाम नासिर दरगाह स्थित हजरत इमाम नासिरउद्दीन अबू युसुफ चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह का 1113वां दो दिवसीय वार्षिक उर्स बुधवार को शुरू हुआ। पंजाब वक्फ बोर्ड की अगुवाई में आयोजित उर्स के पहले दिन अलग-अलग संगठनों ने चादर चढ़ाने के साथ दुआ मांगी। वीरवार को उर्स के दूसरे दिन जालंधर के राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक लोग पहुंचेंगे। हर साल की तरह इस बार भी करीब 100 मीटर लंबी चादर दरगाह पर पेश की जाएगी। इसके बाद पंजाब के नामवर कव्वाल अपनी कव्वाली के जरिए खुदा की इबादत करेंगे। पंजाब वक्फ बोर्ड के स्टेट अफसर शकील अहमद ने बताया कि उर्स के दौरान पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए सभी इंतजाम किए गए हैं। उर्स पर होने वाले खर्च को लेकर वक्फ बोर्ड की तरफ से फंड भी जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस उर्स में पंजाब समेत बाहरी राज्यों से भी श्रद्धालु मजार-ए-अकदस पर चादर और गुलपोशी कर के मन्नतें मांगने आते हैं। मजार पर फातिहा के बाद प्रसाद और दो दिनों तक खाने के लिए लंगर भी लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि हर साल की तरह इस वर्ष भी उर्स बड़ी श्रद्धाभाव के साथ मनाया जा रहा है। 15 जनवरी को सुबह फजर की नमाज के बाद ही श्रद्धालुओं के आने का दौर शुरू हो चुका है। इमाम नासिर दरगाह का मुख्य गेट और क्लॉक टावर आकर्षण का केंद्र है। इस गेट पर मुगलकालीन समय की नक्काशी है, लेकिन समय के साथ ही इसका ठीक से रखरखाव न होने पर ये एतिहासिक धरोहर अपना अस्तित्व खो रही है, जो बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। दरगाह के मुख्य गेट पर लगा क्लॉक टावर इसकी खासियत है। मस्जिद के चारों दीवारें लंबी है, जिन्हें बाजार के बीच से भी आसानी से देखा जा सकता है। देखभाल न होने से यह खराब होता जा रहा है।

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