सेना के अलावा फैक्ट्री कर्मियों में उत्साह:जबलपुर में पहली बार टी-72 टैंकों की मरम्मत… सेना को सौंपे गए दो टैंक

व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) ने भारतीय सेना के लिए टी-72 टैंकों का पायलट ओवरहॉल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह पहली बार है जब टैंकों को मरम्मत के लिए चेन्नई स्थित हेवी व्हीकल फैक्ट्री अवाडी भेजने के बजाय सीधे जबलपुर लाया गया। बुधवार को मरम्मत के बाद दोनों टैंकों को सेना के हवाले किया गया। इन टैंकों की एमओआर यानी मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल का कार्य सीमित संसाधनों के बीच वीएफजे में ही किया गया। आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (एवीएनएल) ने सेना की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए वर्ष 2025 में वीएफजे को पायलट ओवरहॉल की अनुमति दी थी। निर्धारित तकनीकी मानकों पर खरे उतरने के बाद अब वीएफजे को आगे और टैंक मिलने की संभावना है। जानकारी के अनुसार 2026-27 तक 20 टैंक और बाद के वर्षों में लगभग 80 टैंकों की मरम्मत जबलपुर में प्रस्तावित है। हाल ही में गन कैरिज फैक्ट्री द्वारा दो सारंग तोप भी सेना को सौंपी गई थीं। क्यों खास है टी-72 टैंक : टी-72 टैंक का विकास सोवियत संघ में 1967 के आसपास हुआ और 1971 में इसे सेना में शामिल किया गया। इसमें 125 मिमी स्मूदबोर गन, ऑटो-लोडर सिस्टम और शक्तिशाली डीजल इंजन है। स्टील व कंपोजिट आर्मर से लैस यह टैंक रेगिस्तान, मैदानी और कठिन इलाकों में दिन-रात, हर मौसम में युद्धक क्षमता बनाए रखता है।

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