सेवा के बहाने ठगी का पहला मामला:ड्राइवर ने भरोसा जीतकर रिटायर्ड साइंटिस्ट से बैंक ​डिटेल्स ली मोबाइल पर यूपीआई चालू कर 21 बार में निकाले 16 लाख

रिटायर्ड प्रिंसिपल साइंटिस्ट के साथ उनके ही ड्राइवर ने धोखाधड़ी कर दी। बीमारी और अकेलेपन का फायदा उठाकर पहले भरोसा जीता, फिर बुजुर्ग के मोबाइल में यूपीआई चालू कर दिया। चोरी-छिपे रकम निकालनी शुरू कर दी। ड्राइवर ने अपनी पत्नी और दोस्त के साथ मिलकर 58 दिनों में 21 ट्रांजेक्शन कर साइंटिस्ट के खाते से 16 लाख 5 हजार रुपए निकाल लिए। बुजुर्ग को भनक न लगे इसलिए आरोपी ने खाते से पैसे कटने के मैसेज मोबाइल से डिलीट करता रहा। जब एक मैसेज बुजुर्ग ने पड़ लिया तब ठगी का खुलासा हुआ। उन्होंने अपनी बेटी के साथ थाटीपुर थाने में शिकायत कराई। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। बुजुर्ग ने पासबुक से लेकर मोबाइल तक सौंप दिया
भरोसे का फायदा उठाकर आरोपियों ने पहले ओमप्रकाश की बैंक पासबुक और चेक, फिर मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया। अमन राज ने मोबाइल में ऐप डाउनलोड कर यू-पीआई चालू किया और बुजुर्ग की जानकारी के बिना ट्रांजेक्शन शुरू कर दिए। अकेलेपन और बीमारी का उठाया फायदा
थाटीपुर के माधव सिंधिया इन्कलेव में रहने वाले 79 वर्षीय रिटायर्ड प्रिंसिपल साइंटिस्ट ओमप्रकाश सिंह की पत्नी का 4 साल पहले कैंसर से निधन हो चुका है। तब से वे अकेले रह रहे हैं। एक साल से गंभीर बीमारी के चलते उन्हें देखभाल की जरूरत थी। इसी दौरान उनका ड्राइवर अमन राज, उसकी पत्नी और दोस्त हर्ष जरेनिया ने मिलकर साजिश रची, अमन और पत्नी ने सेवा के बहाने बुजुर्ग का भरोसा जीत लिया। 58 दिन में निकाली रकम बेटी ने खाता फ्रीज कराया
ड्राइवर ने 2 अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच 21 ट्रांजेक्शन कर खाते से 16 लाख 5 हजार रुपए निकाल लिए गए। बुजुर्ग ने बेटी मंजू सिंह और दामाद सोहन सिंह नेगी को ठगी की जानकारी दी। इसके बाद बेटी और दामाद ने हेल्पलाइन पर शिकायत की और बैंक खाता फ्रीज कराया। मैसेज डिलीट करना भूल गया ड्राइवर, खुली पोल
29 नवंबर को ड्राइवर एक मैसेज डिलीट करना भूल गया। ओमप्रकाश की नजर जैसे ही मोबाइल पर पड़ी, उन्हें पता चल गया कि उनके साथ ठगी हुई है। उन्होंने 5 दिसंबर को बेंगलुरु में रहने वाली बेटी मंजू सिंह को फोन कर पूरी घटना बताई। सालों से काम कर रहा था ड्राइवर का परिवार
दामाद सोहन सिंह ने बताया कि अमन का परिवार कई सालों से उनके ससुर के यहां काम कर रहा था। पहले उसकी सास, फिर पत्नी घर के काम में लगी रही। परिवार को पता था कि ओमप्रकाश के खाते में अच्छी रकम है, इसी लालच में साजिश रची गई। ठगी के बाद बुजुर्ग की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में भर्ती
धोखाधड़ी सामने आने के बाद से ओमप्रकाश गहरे तनाव में हैं और उनकी हालत और बिगड़ गई। बेटी-दामाद ने उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। ओमप्रकाश के दो बेटे गुरुग्राम में आईटी कंपनी में और बेटी बेंगलुरु में आईटी सेक्टर में हैं। सुरक्षा की पहली शर्त नौकर- ड्राइवर का पुलिस सत्यापन
आज के समय में घरों में चोरी की अधिकांश घटनाएं घरेलू नौकर, ड्राइवर या अन्य सहायक कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है। ऐसे में अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए आवश्यक है कि इनका पुलिस सत्यापन अवश्य कराएं। पुलिस सत्यापन से व्यक्ति की पहचान, स्थायी पता, पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी की पुष्टि होती है।

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