सॉफ्टवेयर में निगम परिसंपत्तियों की डिटेल अपलोड कर 31 मार्च तक ऑनलाइन करने की तैयारी फेल रही है। यही नहीं अलग-अलग ब्रांचों के हैड के ढुलमुल रवैया के कारण डेटा कंपनी के नुमाइंदे को उपलब्ध नहीं कराए जाने से 44 दिन का डिले हो चुका है। दिसंबर 2024 में यह काम शुरू किया गया और मार्च 2025 तक पूरा करने का टारगेट रखा गया था। निगम अफसरों ने 2 मार्च को 99 प्रतिशत काम पूरा होने की बात कही थी मगर एक प्रतिशत अब तक पूरा नहीं हो पाया, जो काम की हकीकत बयां कर रही है। मामले को गंभीरता से लेते हुए एडिश्नल कमिश्नर ने लैटर जारी किया है कि पंजाब म्यूनिसिपल इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कंपनी (पीएमडीआईसी) की तरफ से वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट तहत एसेट मैनेजमेंट सिस्टम निगम शुरू किया गया है। जिसके साथ समूह ब्रांचों के एसेट का डाटा सिस्टम में अपलोड किया जाना है। ताकि इन एसेट के रख-रखाव इस सिस्टम के अनुसार किया जा सके। इस संबंध में जानकारों संग मीटिंग की गई थी। लैटर भी लिखा गया। लेकिन अलग-अलग ब्रांचों से अब तक डेटा हासिल नहीं हो सका। जिस कारण सॉफ्टवेयर के बीच एसेट अपलोड नहीं किए जा सके हैं। यह एक अहम काम है। जिसकी पीएमआईडीसी की तरफ से रोजाना मीटिंग की जा रही है। इसलिए अपने-अपने ब्रांचों के हैड समयबद्ध तरीके से कंपनी के नुमाइंदे कारपोरेट सर्व जो कि कमरा नंबर-305 में बैठते हैं, तालमेल करके सूचना उपलब्ध कराए । अधिक जानकारी के लिए कंपनी के नुमाइंदे से संपर्क कर सकते हैं। बता दें कि निगम की चल-अचल संपत्ति और विकास कार्यों में गड़बड़ियां रोकने के लिए 29 ब्रांचों का डाटा सिस्टम एप्लीकेशन एंड प्रोडक्ट्स इन डाटा प्रोग्रेस (सैप) सॉफ्टवेयर में अपलोड करने का काम लगभग ब्रांचों 99 प्रतिशत तक पूरा होने का दावा निगम अफसरों ने बीते 2 मार्च को ही किया था। कुछ ब्रांचों का डेटा रह गया था। इस हकीकत की पोल भी खुलती नजर आ रही कि 44 दिनों बाद भी बचा एक फीसदी काम पूरा नहीं कराया जा सका है। दरअसल, निगम के सारे एसेट डिजिटाइज होने के बाद सिविल-हेल्थ-ओएंडएम-स्ट्रीट लाइट से लेकर दूसरे ब्रांचों के कुर्सी-मेज-कंप्यूटर से लेकर सड़क-पार्क व ग्रीनरी सहित अन्य डिटेल एक क्लिक पर मिलेगी। उच्च अफसरों की नजर में सारी डिटेल बनी रहेगी। ऐसे में गड़बड़ियों को अंजाम नहीं दिया जा सकेगा।


