सोजत में एक दुकान विवाद में हुई हत्या के मामले में बुधवार को अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश दिनेश कुमार गढ़वाल ने अहम फैसला सुनाया। मुख्य आरोपी हिमांशु माली उर्फ सेंटी को आजीवन कारावास की सजा के साथ 50 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया, जबकि अन्य दो आरोपियों रवि प्रजापत और चंपालाल माली को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। यह मामला साढ़े चार साल पुराना है। मेडिकल व्यवसायी कानाराम सीरवी ने मेहता मार्केट के सामने स्थित झरोखा वाली हवेली खरीदी थी। इस बिल्डिंग में मोहनलाल माली पिछले 20 वर्षों से किराए पर इलेक्ट्रिक की दुकान चला रहा था। कानाराम ने दुकान खाली करने के लिए कई बार बात की, लेकिन मोहनलाल तैयार नहीं हुआ। 28 अगस्त 2020 को इसी विवाद पर कानाराम सीरवी और मोहनलाल के बेटे हिमांशु के बीच बहस हुई। बहस के दौरान आवेश में आकर हिमांशु ने गलेंडर से कानाराम की गर्दन पर वार कर दिया और मौके से फरार हो गया। गंभीर रूप से घायल कानाराम को सोजत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई। मृतक के भाई देवाराम की शिकायत पर पुलिस ने हिमांशु और उसकी दुकान पर काम करने वाले रवि और चंपालाल के खिलाफ मामला दर्ज किया। जांच के बाद तीनों के खिलाफ हत्या का आरोप तय किया गया। अदालत में सरकार की ओर से मामले की पैरवी अपर लोक अभियोजक पंकज त्रिवेदी ने की।


