मोबाइल की स्क्रीन पर रिजल्ट खुलते ही कुछ सेकेंड का सन्नाटा…फिर आंखों से बहते आंसू और चेहरे पर यकीन न कर पाने वाली मुस्कान। राजस्थान के श्रीगंगानगर की गीताली गुप्ता का यह वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है। यह वीडियो किसी प्रमोशनल रील या तैयार किए गए कंटेंट जैसा नहीं, बल्कि सालों की मेहनत का सबसे सच्चा रिएक्शन है। देश की टॉप लॉ यूनिवर्सिटीज में एडमिशन के लिए होने वाली कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट यानी CLAT में गीताली ने ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की है।
119 में से 112.75 अंक लाकर उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार और स्कूल, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया। वायरल वीडियो के बाद हर कोई यही जानना चाहता है कि आखिर गीताली की सफलता का फॉर्मूला क्या रहा। जब उन्होंने खुद अपनी तैयारी के बारे में खुलकर बताया तो यह कहानी किसी मोटिवेशनल भाषण से ज्यादा एक आम छात्र की ईमानदार और प्रैक्टिकल सोच को दर्शाती है। गीताली ने रविवार को भोपाल आकर दैनिक भास्कर कार्यालय में हमसे विस्तृत बात की। सोशल मीडिया पर वायरल गीताली की तैयारी की सबसे अहम बात रही सोशल मीडिया से दूरी। वह बताती हैं कि उन्होंने बहुत जल्दी यह समझ लिया था कि सोशल मीडिया समय से ज्यादा मानसिक ऊर्जा खा जाता है। “क्लास 10 में मैंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पूरी तरह डिएक्टिवेट कर दिए थे। 11वीं और 12वीं में दोबारा अकाउंट बनाए, लेकिन इस्तेमाल बहुत सीमित रखा।” गीताली के मुताबिक, CLAT परीक्षा से करीब छह महीने पहले उन्होंने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली। उनका मानना है कि रील्स और पोस्ट देखने में दिमाग की वह ऊर्जा खर्च हो जाती है, जो पढ़ाई में लगनी चाहिए। रिजल्ट देख समझ नहीं आया कि यह सच है या नहीं
गीताली बताती हैं कि CLAT का रिजल्ट देखने का वह पल आज भी उनके मन में पूरी तरह ताजा है। वह कहती हैं, मैं घर में मंदिर के पास बैठी थी। मोबाइल पर रिजल्ट चेक कर रही थी। जैसे ही स्क्रीन पर रैंक दिखी, कुछ सेकेंड तक मुझे समझ ही नहीं आया कि यह सच है या नहीं। उस समय घर में सन्नाटा था, लेकिन उनके भीतर भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। गीताली कहती हैं कि जो आंसू निकले, वे सिर्फ खुशी के नहीं थे, बल्कि उनमें उन तमाम रातों की मेहनत, तनाव और त्याग छुपा था, जब उन्होंने खुद को सोशल मीडिया और बाकी distractions से दूर रखा था। रियल लाइफ को ही दी प्राथमिकता
गीताली कहती हैं कि उन्हें सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से ज्यादा अपने आसपास की असली जिंदगी पसंद है। यह ज्यादा अच्छा लगता है कि मैं अपने दोस्तों के साथ बाहर निकलूं, वॉक पर जाऊं या उनसे आमने-सामने बात करूं। इससे माइंड रिलैक्स रहता है और पढ़ाई के समय फोकस अपने आप बन जाता है। गीताली मानती हैं कि आज के स्टूडेंट्स अक्सर रील लाइफ में उलझ जाते हैं, जबकि असली जिंदगी से जुड़ाव ही मानसिक संतुलन बनाए रखता है। यही संतुलन लंबे समय तक तैयारी में मदद करता है। रिजल्ट की चिंता नहीं, बेस्ट देने पर फोकस
गीताली बताती हैं कि उनकी तैयारी का सबसे बड़ा मंत्र यह था कि उन्होंने कभी रिजल्ट के बारे में सोचकर पढ़ाई नहीं की। फोकस सिर्फ इतना था कि हर दिन अपनी तरफ से बेस्ट दूं। रिजल्ट क्या होगा, इस बारे में खुद को सोचने से रोका। इसी वजह से जब रिजल्ट सामने आया, तो उनका रिएक्शन पूरी तरह नेचुरल था। वायरल वीडियो में दिखने वाला उनका भाव किसी प्लान का हिस्सा नहीं था, बल्कि उस मानसिकता का नतीजा था, जिसमें मेहनत के बाद अपेक्षाएं नहीं, बल्कि संतोष होता है। सुबह की शुरुआत गानों और अखबार से
गीताली का डेली रूटीन बहुत सख्त नहीं, बल्कि संतुलित रहा। वह बताती हैं कि सुबह उठते ही वह कुछ समय गाने सुनती थीं, अखबार पढ़ती थीं और गूगल पर ट्रेंडिंग टॉपिक्स देखती थीं। इससे दुनिया से जुड़ा हुआ महसूस होता था और माइंड एक्टिव रहता था। पढ़ाई से जुड़े वीडियो देखने का काम वह रात में करती थीं, ताकि दिन के समय फोकस पूरी तरह किताबों पर बना रहे। उनके मुताबिक, सही समय पर सही काम करना भी तैयारी का अहम हिस्सा होता है। टोना-टोटका नहीं, भगवान के नाम पर भरोसा
गीताली साफ कहती हैं कि वह टोना-टोटका या अंधविश्वास में भरोसा नहीं करतीं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि हर एग्जाम से पहले भगवान का नाम लेने की आदत उनमें अपने आप बन गई थी। इससे मन को शांति मिलती थी और डर कम होता था। उनका मानना है कि अगर किसी चीज से किसी को मानसिक सुकून मिलता है, तो वह गलत नहीं है। असल बात यह है कि परीक्षा से पहले खुद को मानसिक रूप से स्थिर रखना जरूरी होता है। खुद की पढ़ाई की स्टाइल समझना जरूरी
गीताली ने कहा कि हर स्टूडेंट को सबसे पहले यह समझना चाहिए कि उसकी पढ़ाई की शैली क्या है। वे एक जगह बैठकर लंबे समय तक पढ़ नहीं पाती। चलते-चलते पढ़ना ज्यादा सूट करता है। कई बार रिवीजन के दौरान वह हल्के गाने भी सुनती थीं। दिलचस्प बात यह है कि परीक्षा के समय वही गाने उन्हें टॉपिक याद दिलाने में मदद करते थे। उनके मुताबिक, पढ़ाई में फ्लेक्सिबिलिटी रखना भी उतना ही जरूरी है जितना डिसिप्लिन। फिक्स्ड स्टडी आवर्स नहीं, डेली टारगेट पर भरोसा
गीताली ने कभी फिक्स्ड स्टडी आवर्स का दबाव खुद पर नहीं डाला। वो बस हर दिन के लिए एक टारगेट तय किया और उसे पूरा करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि घंटों की गिनती से ज्यादा जरूरी यह है कि आपने क्या पढ़ा और कितना समझा। यही सोच उन्हें लंबे समय तक बर्नआउट से बचाती रही और तैयारी लगातार चलती रही। स्कूल और कोचिंग के संतुलन से बनी मजबूत तैयारी
गीताली ने स्कूल की पढ़ाई और CLAT की तैयारी को साथ-साथ आगे बढ़ाया। वह बताती हैं कि स्कूल ने उनके कॉन्सेप्ट मजबूत किए, जबकि कोचिंग ने परीक्षा के पैटर्न, टाइम मैनेजमेंट और स्ट्रेटजी को समझने में मदद की। दोनों का बैलेंस ही मेरी तैयारी का सबसे मजबूत हिस्सा था। पूरे देश में बनाई पहचान
श्रीगंगानगर जैसे छोटे शहर से निकलकर देशभर में पहला स्थान हासिल करना गीताली की कहानी को खास बनाता है। उनके पिता जगदीश कुमार गुप्ता व्यवसायी हैं और मां भारती गुप्ता तहसील में सूचना सहायक हैं। परिवार का कहना है कि सकारात्मक माहौल और पढ़ाई के प्रति गंभीरता ने गीताली को इस मुकाम तक पहुंचाया। उनकी कहानी यह साबित करती है कि बड़े सपनों के लिए बड़े शहर नहीं, बल्कि सही सोच और लगातार मेहनत चाहिए।


