उदयपुर की सौर वेधशाला अब दुनिया भर के वैज्ञानिकों के आकर्षण का केंद्र बनने जा रही है। साल 1975 में स्वप्नदर्शी वैज्ञानिक दिवंगत अरविंद भटनागर द्वारा स्थापित इस संस्थान के 50 साल पूरे होने पर स्वर्ण जयंती उत्सव मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में 10 से 13 फरवरी तक सौर भौतिकी पर एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। भुवाणा स्थित थर्ड स्पेस में होने वाले इस इवेंट का विषय ‘एक्सप्लोरिंग द सन एट हाई-रिजोल्यूशन: प्रेजेंट पर्सपेक्टिव्स एंड फ्यूचर होराइजन्स’ रखा गया है। फतहसागर झील के टापू पर स्थित यह वेधशाला बनी हुई है। संस्थान के निदेशक शिबू मैथ्यू ने बताया कि उदयपुर सौर वेधशाला आज सौर भौतिकी के क्षेत्र में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थान बन चुकी है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन विशेषज्ञों को उन्नत दूरबीनों और मिशनों से प्राप्त सौर वायुमंडलीय घटनाओं के निष्कर्षों को साझा करने के लिए एक साझा मंच प्रदान करेगा। मैथ्यू के अनुसार, यह वर्ष दोहरा महत्व रखता है, क्योंकि यह भारत की सबसे उन्नत सौर अवलोकन सुविधा ‘मास्ट’ (MAST) की 10वीं वर्षगांठ भी है। इसरो के पूर्व चीफ करेंगे उद्घाटन
इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत और विदेशों से करीब 100 प्रतिष्ठित सौर भौतिकविद उदयपुर पहुंच रहे हैं। कार्यक्रम का आधिकारिक उद्घाटन 10 फरवरी को होगा, जिसमें इसरो और अंतरिक्ष आयोग के पूर्व अध्यक्ष पद्मश्री ए.एस. किरण कुमार अपना संबोधन देंगे। इस मौके पर लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ सम्मानित अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। उद्घाटन सत्र में अनिल भारद्वाज स्वागत भाषण देंगे और भुवन जोशी वेधशाला के ऐतिहासिक सफर का अवलोकन पेश करेंगे। सूरज की हर हलचल पर पैनी नजर
वेधशाला का मुख्य उद्देश्य सूर्य की वायुमंडलीय परतों के बीच होने वाली जटिल क्रियाओं को समझना है। निदेशक शिबू मैथ्यू ने बताया कि वेधशाला के अनुसंधान के केंद्र में ‘मास्ट’ टेलीस्कोप है, जो उच्च रिजोल्यूशन वाली जांच को सक्षम बनाता है और भारत के ‘आदित्य एल-1’ मिशन के डेटा का पूरक बनता है। चर्चा का बड़ा हिस्सा इस बात पर रहेगा कि सौर चुंबकीय क्षेत्र किस तरह हमारी संचार प्रणाली और अंतरिक्ष आधारित प्रौद्योगिकियों को प्रभावित करते हैं। सुपर कंप्यूटर से होगा डेटा विश्लेषण
उदयपुर की इस वेधशाला में मास्ट के साथ-साथ जीओएनजी और ई-केलिस्टो जैसे अन्य उपकरण भी सौर घटनाओं के अध्ययन में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इन उपकरणों से मिलने वाले डेटा का विश्लेषण भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) के सुपर कंप्यूटरों के माध्यम से किया जाता है। यह चार दिवसीय कार्यशाला भविष्य में सौर भौतिकी की दिशा तय करने में मील का पत्थर साबित होगी। यह वेधशाला पिछले पांच दशकों से सूरज के रहस्यों को सुलझाने में लगी है। निदेशक शिबू मैथ्यू ने सम्मेलन के महत्व को बताते हुए कहा कि इससे न केवल वैज्ञानिकों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का मौका मिलेगा, बल्कि यह भारत के भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए भी नई राह खोलेगा। सम्मेलन के दौरान निदेशक शिबू मैथ्यू स्वयं उदयपुर में इस आयोजन के महत्व पर अपने विचार रखेंगे।


