बालोद| प्रदेश के प्राथमिक से लेकर हाई स्कूलों में पहले सहायक वाचन पढ़ाया जाता था, जिससे बच्चों को पशु-पक्षियों, जीव-जंतुओं तथा महापुरुषों की जीवनियों की महत्वपूर्ण जानकारी मिलती थी। इससे बच्चों के नैतिक एवं बौद्धिक विकास में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता था। सहायक वाचन से बच्चों में पढ़ने की रुचि बढ़ती थी और उनके संस्कार मजबूत होते थे। वर्तमान समय में इस विषय के अभाव में बच्चों का नैतिक विकास प्रभावित हो रहा है। सहायक वाचन को पुनः पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।


