स्कूल संचालकों और अभिभावकों की लापरवाही:अपार में अभिभावकों की रुचि नहीं, डीग जिले में सिर्फ 55.30% विद्यार्थियों की आईडी बनी, 1 लाख वंचित

डीग जिले में वन नेशन वन स्टूडेंट की तर्ज पर तैयार हो रही अपार आईडी के कार्य में स्कूल संचालकों और अभिभावकों द्वारा लापरवाही बरती जा रही है। अक्टूबर से शुरू हुए अभियान में अब तक केवल 55.30 प्रतिशत स्कूली बच्चों की ही अपार आईडी बन पाई है। जिले के 1441 स्कूलों के 2 लाख 25 हजार 890 विद्यार्थियों में से अभी तक एक लाख 24 हजार 920 विद्यार्थियों की ही अपार आईडी बन सकी है। यानि, 1 लाख 970 विद्यार्थी अभी भी इस आईडी से वंचित हैं। ऐसे में शेष 44.70 फीसदी की अपार आईडी बनना कठिन काम हो गया है। दूसरी ओर पाठ्यक्रम पूरा करवाना और पढ़ाई बाधित होने जैसे हालात में शिक्षा विभाग का अपार आईडी जेनरेट करने – का दबाव भी बना हुआ है। जबकि 25 विद्यालय जिले में ऐसे हैं जिन्होंने अभी अपार आईडी बनाने का कार्य ही प्रारंभ नहीं किया है। अब विद्यालय संचालकों को नोटिस देकर विभागीय कार्यवाही प्रारंभ कर रहे हैं। वन नेशन वन स्टूडेंट स्कीम के तहत बन रही है आईडी डीग जिले में शिक्षा के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। जिले में 1441विद्यालय में 2 लाख 25 हजार 890 नामांकन हैं, 124920 की अपार आईडी बन गई है। डीग जिला राजस्थान में 12वें स्थान पर है, जो 55.30 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रहा है। जबकि भरतपुर जिला राजस्थान में 40 नंबर पर है। इसलिए जरूरी- अपार आईडी में दर्ज होगा शैक्षणिक रिकॉर्ड यह एक शैक्षिक आईडी कार्ड के बारे में जानकारी है, जिसमें विद्यार्थी के शैक्षणिक इतिहास की जानकारी होगी। इस आईडी कार्ड में विद्यार्थी के पाठ्यक्रम, अंक तालिका, प्रमाण पत्र और अन्य शैक्षणिक जानकारी होगी। यह आईडी कार्ड विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक दस्तावेजों को आसानी से प्राप्त करने में मदद करेगी और स्थानांतरण एवं नौकरी के लिए भी उपयोगी होगी। आप भी जानें, क्यों नहीं बन रही आईडी बच्चों के आधार कार्ड नहीं बन पा रहे हैं। जन्म प्रमाण पत्र में माता-पिता का आधार जोड़ने के लिए नगरपालिका में कोई ऑप्शन नहीं होना एक बड़ी समस्या है। इसके कारण बच्चों की अपार आईडी जनरेट नहीं हो पा रही है, जो कि उनकी शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं के लिए बहुत जरूरी है। शिक्षकों को भी इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें बच्चों की अपार आईडी जनरेट करनी होती है। “अपार आईडी बनाने को लेकर सरकारी और निजी स्कूल के संस्था प्रधानों को बार बार निर्देशित किया जा रहा है। अभिभावकों से भी अनुरोध है कि वे स्कूल प्रबंधन का सहयोग करें। राजस्थान में डीग जिला 12 बें नंबर पर है। 55.30 % विद्यार्थियों की आईडी बन चुकी है। जल्द से जल्द शत प्रतिशत आईडी बनाने के प्रयास जारी हैं।” -मनोज खुराना, डीईओ डीग।

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