राजगढ़ के अग्रणी महाविद्यालय में बुधवार को विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। राजनीति विज्ञान विभाग और राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई ने संयुक्त रूप से इस विचार संगोष्ठी का आयोजन किया। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं में मानव अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना और उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. मंगलेश सौलंकी ने कहा कि मानव अधिकार जन्म से प्राप्त होते हैं और ये मनुष्य की मूल पूंजी हैं। उन्होंने छात्रों से समाज के कमजोर वर्ग के अधिकारों के संरक्षण के लिए जागरूक भूमिका निभाने की अपील की। मुख्य वक्ता संतोष खरे ने अधिकारों और कर्तव्यों के संतुलन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और बिना कर्तव्य के अधिकारों की कल्पना अधूरी है। डॉ. सोहन शर्मा ने विश्व मानवाधिकार दिवस के इतिहास और इसकी वैश्विक पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इसे मानव गरिमा की रक्षा के संकल्प को मजबूत करने का अवसर बताया। इस संगोष्ठी में डॉ. रजनी खरे, श्रीमती सीमा सिंह, डॉ. बी.एल. वर्मा और प्रकाश अहिरवार सहित महाविद्यालय के स्टाफ सदस्य और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला संयोजक डॉ. शैलेन्द्र कुमार मेवाड़े ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन मोहन पुरी द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में मानव अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उनमें सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया।


