स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में 54 करोड़ की लीनियर मशीन लगी:कैंसर में थैरेपी से ‘गुड सेल्स’ पर साइड इफैक्ट नहीं, चौथी स्टेज में भी मिलेगा कारगर इलाज

कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए आशा की किरण जगाने वाली खबर। स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (एससीआई) में लीनियर एक्सीलेटर मशीन से इलाज शुरू किया गया है। अभी इस मशीन के नहीं होने से मरीज इलाज के लिए परेशान होते थे, या फिर निजी अस्पतालों में 25 लाख तक का खर्च आता था। एससीआई का दावा है कि यह मशीन सबसे लेटेस्ट है। इससे ब्रेन, लिवर, लंग्स के कैंसर का इलाज हो सकेगा। सबसे सुखद पहलू यह है कि इस मशीन से तीसरी या चौथी स्टेज के कैंसर का इलाज संभव होगा। 54 करोड़ की इस मशीन को पीपीपी के तहत लगाया गया है। इसमें 45 प्रतिशत रेवेन्यू सरकार को भी मिल रहा है। तीसरी स्टेज के सर्विक्स कैंसर में भी मीना को कारगर इलाज मिला 25 सीटिंग के बाद मरीज को कैंसर में 60 फीसदी तक राहत लीनियर मशीन से एक बार में ही पकड़ में आ जाती है बीमारी यह लीनेक हाई एनर्जी मशीन है और किसी भी पेशेंट के इलाज से पहले इससे ही इमेज ली जाती हैं। एक बार में ही हजारों इमेज आती हैं और बीमारी और कैंसर सेल्स की वास्तविक जगह और स्थिति पता चल जाती है। यहां तक कि मरीज की सीटी स्कैन भी साथ ही हो जाती है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि जांच के दौरान गांठ में मूवमेंट होता है तो मशीन उसके अनुसार की कैंसर सेल्स को केप्चर करती है। इससे डॉक्टर को एक बार में ही सभी रिपोर्ट मिल जाती हैं और मरीज को भी बार-बार जांच के लिए परेशान नहीं होना पड़ता। मालूम हो कि राजस्थान के हर व्यक्ति के लिए यहां निशुल्क इलाज है। जबकि निजी अस्पताल में इस मशीन से जांच और एक सिटिंग के इलाज में दो लाख रुपए तक का खर्च आता है।

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