भास्कर न्यूज | महासमुंद प्रदेश सहित जिले में लगाएं गए नए स्मार्ट मीटर की खामियों को बताते हुए आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष राकेश झाबक ने कहा कि छग में जो हर घर में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, उसके दुष्परिणाम आने लगे हैं, स्मार्ट मीटर लगने के बाद जनता परेशान हो चुकी है। जिन उपभोक्ताओं का बिल 300-400 रुपए आता था, उनका स्मार्ट मीटर लगाने के बाद 1000-1200 रुपए आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि बिजली लो वोल्टेज की समस्या भी परेशानी दे रही है जिससे इलेक्ट्रॉनिक सामान खराब हो रहें हैं। दरअसल स्मार्ट मीटर भारत के क्लाइमेट के हिसाब से नहीं बना है,स्मार्ट मीटर अभी तो समझ में नहीं आ रहा लोगों को जब टेंपरेचर बढ़ेगा गर्मी में तो मीटर और तेजी से घूमेगा और ज्यादा बिल आएगा स्मार्ट मीटर भारत के मौसम में फीट नहीं बैठता वह ठंडे प्रदेशों के लिए ठीक है। झाबक ने कहा कि एक ओर तो सरकार डिजिटल तकनीक सुविधाओं को बढ़ाने का दावा करती है, लेकिन स्मार्ट मीटर की कमियों ने सरकार की इन दावों की पोल खोल दी है। स्मार्ट मीटरों में खामियों को लेकर हाल में कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की हैं। स्मार्ट मीटर का उद्देश्य बिजली उपभोग की सटीक निगरानी, ऑटोमैटिक रीडिंग और रियल-टाइम डेटा उपलब्ध कराना है, लेकिन कई जगह तकनीकी और संचालन संबंधी खामियां सामने आई हैं। रियल-टाइम डेटा ट्रांसमिशन की त्रुटियों से खपत ज्यादा दिख सकती है। खराब नेटवर्क के कारण रीडिंग सर्वर तक सही से नहीं पहुंचती। इससे बिलिंग चक्र में गड़बड़ी हो जाती है। मीटर सही ढंग से कैलिब्रेट न होने पर बिजली खपत अधिक या कम दिख सकती है। सरकार को स्मार्ट मीटर की तकनीकी समस्या का समाधान तत्काल करना चाहिए।


