स्लॉटर हाउस का मकसद-शर्तें क्या? हर कड़ी की पड़ताल:100 करोड़ की सरकारी जमीन पर बनाया; आदमपुर का रेंडरिंग प्लांट भी सील

भोपाल में गोमांस मिलने के मामले में अब आधुनिक स्लॉटर हाउस से जुड़ी पूरी फाइल की गहन जांच की तैयारी है। नगर निगम के उच्च स्तर पर निर्णय लिया गया है कि टेंडर की शर्तें तय होने से लेकर टेंडर आवंटन और अंत में कमिश्नर के हस्ताक्षर तक की हर कड़ी की पड़ताल होगी। ताकि, स्पष्ट हो सके कि करीब 100 करोड़ की सरकारी जमीन पर 33 करोड़ रुपए की लागत से मॉर्डन स्लॉटर हाउस के प्रोजेक्ट, किस उद्देश्य से और किन शर्तों पर तैयार की। इधर, गोमांस मिलने का मामला फिलहाल शांत होते नजर नहीं आ रहा है। भले ही इस मामले में वेटनरी डॉक्टर समेत कुल 9 कर्मचारियों पर निलंबन की गाज गिर गई हो, लेकिन विपक्ष ‘शहर सरकार’ पर हमलावर है। निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने अब महापौर मालती राय के स्लॉटर हाउस में निरीक्षण करते हुए वीडियो जारी किया है। नेता प्रतिपक्ष जकी ने लिखा कि आधुनिक स्लॉटर हाउस बनने के बाद असलम चमड़ा के साथ महापौर निरीक्षण करते हुए। बता दें कि मेयर इन कौंसिल ने आधुनिक स्लॉटर हाउस के 20 साल तक संचालन की जिम्मेदारी असलम चमड़ा को ही सौंपी है। स्लॉटर हाउस से निकले मांस में गोमांस मिलने के मामले में ही पुलिस ने असलम चमड़ा को आरोपी बनाया है। संपत्ति की जांच हो, एनएसए की कार्रवाई भी हो
गोमांस तस्करी के मामले में हिंदू उत्सव समिति ने आरोपी असलम चमड़े के मकान पर बुलडोजर चलाने की मांग की। अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि असलम चमड़े के ऊपर NSA की कार्रवाई करते हुए उसके घर पर बुलडोजर चलाया जाना चाहिए। साथ ही भोपाल में उसकी संपत्ति एवं आपराधिक प्रकरणों की जांच भी हो। यह भी पता लगाया जाए कि स्लॉटर हाउस में उसके साथ कौन लोग काम करते थे? वे रोहिंग्या तो नहीं है। समिति को यह आंदेशा है। संचालक असलम पर भी कार्रवाई तेज की
दूसरी ओर, स्लॉटर हाउस संचालक असलम पर प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। नगर निगम ने आदमपुर खंती क्षेत्र में स्थित उसके रेंडरिंग प्लांट को सील कर दिया है। इस प्लांट में मृत मवेशियों के वेस्ट से पालतू जानवरों के लिए दाना और अन्य उत्पाद बनाए जाते थे। निगम का कहना है कि फिलहाल यहां सभी गतिविधियां पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। मामले को लेकर निगम परिषद अध्यक्ष किशन सिंह सूर्यवंशी ने कमिश्नर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। जिससे पूरी कार्रवाई की गंभीरता पर संदेह पैदा होता है। परिषद अध्यक्ष ने बताया कि उच्च स्तरीय जांच समिति के गठन के लिए गुरुवार को शासन को पत्र लिखा जाएगा। रेंडरिंग प्लांट सील, उत्पादन ठप
निगम अधिकारियों के अनुसार आदमपुर खंती स्थित रेंडरिंग प्लांट की क्षमता प्रतिदिन लगभग 5 टन वेस्ट से उत्पाद बनाने की थी। यहां कुत्ते, बिल्ली और मुर्गी के लिए दाने के साथ अन्य उत्पाद भी तैयार होते थे। अब प्लांट पर ताला लगाकर सभी तरह की प्रोसेसिंग रोक दी गई है। वन विहार से भी हटाई गई सप्लाई
वन विहार प्रबंधन ने भी असलम से दूरी बना ली है। वन विहार के मुताबिक, मई 2025 में जानवरों के लिए मांस आपूर्ति का अनुबंध हुआ था, लेकिन मामला सामने आते ही असलम की एंट्री बंद कर दी गई। अब वन विहार के भीतर ही वैकल्पिक व्यवस्था के तहत प्राइवेट वेंडर से स्लॉटिंग कराई जा रही है। इस संबंध में नगर निगम और पुलिस को भी सूचना दी गई है। एफआईआर न होने पर उठे सवाल
निगम अध्यक्ष सूर्यवंशी ने कहा कि अनुबंध उल्लंघन की स्थिति में एफआईआर कराने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद एफआईआर दर्ज न होना गंभीर सवाल खड़े करता है। वहीं एमआईसी सदस्य आरके बघेल ने कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद उल्लंघन पाए जाने पर असलम के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। डॉक्टरों और अन्य संबंधित भूमिकाओं की भी जांच की जा रही है। अवैध स्लॉटिंग पर निगम की चुनौती
निगम सूत्रों के अनुसार असलम का मुख्य कारोबार मांस निर्यात का था, जबकि स्थानीय सप्लाई सीमित थी। मॉर्डन स्लॉटर हाउस शुरू होने पर शहर में अवैध स्लॉटिंग पर रोक लगनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अब स्लॉटर हाउस बंद होने के बाद शहर में अवैध स्लॉटिंग बढ़ने की आशंका है, जिस पर सख्त कार्रवाई की जरूरत बताई जा रही है। जांच के दायरे में टेंडर और अधिकारी
जांच समिति का फोकस इस बात पर रहेगा कि टेंडर की शर्तें किसने और किन आधारों पर तैयार कीं, टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन थी या ऑफलाइन, किस आधार पर असलम और उसकी फर्म को काम सौंपा गया, और इस पूरे मामले में किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि एमआईसी के अधिकार क्या थे और शर्तों के उल्लंघन पर निगम को क्या कदम उठाने थे। स्लॉटर हाउस में गोमांस का यह मामला
जिंसी स्थित नगर निगम के स्लॉटर हाउस में गायों का वध किए जाने और गोमांस मुंबई भेजे जाने के मामले में नगर निगम प्रशासन की सीधी भूमिका सामने आई है। नगर निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी की ओर से जारी वह पत्र सामने आया है, जिसके आधार पर मांस को स्लॉटर हाउस से बाहर ले जाने की अनुमति दी गई थी। स्लॉटर हाउस को शुरू करने संबंधित अनुमति एमआईसी ने दी थी। यह प्रस्ताव परिषद में भी नहीं आया। इस वजह से कांग्रेस के साथ बीजेपी पार्षद भी नाराज हैं। इसके चलते वेटनरी डॉक्टर गौर को संभागायुक्त संजीव सिंह ने सस्पेंड कर दिया है। वहीं, स्लॉटर हाउस में तैनात वसीम खान, सलीम खां, राजा खां, शेख यूसुफ, वहीद खान, मोहम्मद फैयाज खान, ईसा मोहम्मद, अब्दुल रहमान को सस्पेंड कर दिया गया। युसूफ खान, अब्दुल हकीम और मोहम्मद रफीक को नोटिस थमाए गए हैं। ये खबर भी पढ़ें… भोपाल में गोमांस का मामला, मंत्री सारंग बोले-कड़ी कार्रवाई करेंगे भोपाल के आधुनिक स्लॉटर हाउस की गाड़ी में मिले मांस में गोमांस की पुष्टि होने के बाद ‘शहर सरकार’ चारों तरफ से घिर गई है। विपक्ष लगातार महापौर और एमआईसी (मेयर इन कौंसिल) का इस्तीफा मांग रहा है। नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने कहा कि एमआईसी की मीटिंग में स्लॉटर हाउस का प्रस्ताव पास कर दिया गया। न तो परिषद में प्रस्ताव लाया गया और न ही शहर को बताया। यह स्लॉटर हाउस 20 साल के लिए दिया गया है।पूरी खबर पढ़ें

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