मैहर। स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान देने वाले वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी अक्षयवर नाथ तिवारी का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से मैहर क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। तिवारी का मूल निवास उत्तर प्रदेश के मर्दापुर में था, लेकिन वे लंबे समय तक मैहर के ग्राम पहाड़ी में रहे और यहां के सामाजिक व स्वतंत्रता सेनानी परिवारों से उनका गहरा जुड़ाव रहा। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहते हुए उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आवाज़ उठाई। बाद में, 1977 के आपातकाल के दौरान उन्हें मीसा बंदी के तहत 11 माह तक कैद में रखा गया था। इन कठिन परिस्थितियों में भी उनके संघर्ष और सिद्धांतों ने उन्हें क्षेत्र का सम्मानित सामाजिक व्यक्तित्व बनाया। उनके निधन पर स्थानीय प्रशासन की ओर से पूर्ण राजकीय सम्मान देते हुए गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और परिचित उनके अंतिम दर्शन के लिए उपस्थित हुए। तिवारी की देशभक्ति और संघर्ष के प्रसंगों को याद करते हुए लोगों की आंखें नम हो गईं। परिवारजनों और उपस्थित लोगों की सहमति से उनका अंतिम संस्कार प्रयागराज में करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए उनके पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ प्रयागराज ले जाया गया। अंतिम विदाई के दौरान प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से एसडीएम दिव्या पटेल, सीएसपी महेंद्र सिंह, तहसीलदार जितेंद्र पटेल, समाजसेवी रामनिवास उर्मालिया, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामवासी शामिल थे। सभी ने स्वतंत्रता सेनानी तिवारी के पार्थिक शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। अक्षयवर नाथ तिवारी का जीवन सादगी, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक रहा। उनके निधन से मैहर क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। लोगों ने कहा कि उनका जाना समाज और आगामी पीढ़ी के लिए अपूरणीय क्षति है, क्योंकि वे स्वतंत्रता संग्राम के उन गिने-चुने योद्धाओं में से थे, जिन्होंने प्रत्यक्ष रूप से अंग्रेजी शासन की प्रताड़नाएं झेली थीं। तस्वीरें देखिए…


