स्वतंत्रता सेनानी शंकरन नायर को याद किया बीजेपी ने:शहज़ाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर मुद्दे को उठाया; बोले- कांग्रेस ने शंकरन नायर को इतिहास से मिटा दिया

भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और वामपंथी दलों पर सवाल उठाया है। पार्टी ने पूछा कि महान स्वतंत्रता सेनानी सी. शंकरन नायर को क्यों भुलाया जा रहा है। बीजेपी प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और वामपंथी औरंगजेब की प्रशंसा करते हैं। लेकिन शंकरन नायर को इतिहास से मिटा दिया गया। क्योंकि उन्होंने हिंदुओं और सिखों के लिए आवाज उठाई। केरल के पलक्कड़ में जन्मे शंकरन नायर एक प्रसिद्ध वकील और निडर स्वतंत्रता सेनानी थे। वे 1897 में कांग्रेस के अध्यक्ष बने। 1915 में वायसराय की कार्यकारी परिषद में शिक्षा मंत्री बने। जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद उन्होंने ब्रिटिश सरकार को कोर्ट में घसीटा। वे उस समय ब्रिटिश सरकार की कार्यकारी परिषद के सदस्य थे। लेकिन जब उन्होंने लॉर्ड चेम्सफोर्ड को खुली चुनौती दी, तो उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। 1921 के मोपला विद्रोह में हजारों हिंदुओं की हत्या की गई। महिलाओं पर अत्याचार हुए और मंदिर तोड़े गए। कांग्रेस ने इसे सिर्फ किसान विद्रोह बताया। लेकिन नायर ने इस झूठ को बेनकाब किया। उन्होंने कहा कि यह धार्मिक कट्टरता का नतीजा था। मगर कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति ने इस सच को दबा दिया। ‘केसरी चैप्टर 2’ और नायर की विरासत का पुनर्जागरण जल्द ही रिलीज़ होने वाली फिल्म ‘केसरी चैप्टर 2: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ जलियांवाला बाग’ में सी. शंकरन नायर के जीवन को दिखाया जाएगा। यह फिल्म करण सिंह त्यागी द्वारा निर्देशित है और इसमें अक्षय कुमार, आर. माधवन और अनन्या पांडे मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म 18 अप्रैल 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली है। फिल्म के टीज़र में अक्षय कुमार को नायर की भूमिका में दिखाया गया है, जिसमें वे ब्रिटिश सरकार से टकराते और न्याय के लिए संघर्ष करते नजर आते हैं। यह फिल्म इतिहास के पन्नों में दबे एक सच्चे नायक को सामने लाने का प्रयास है। इतिहास से मिटाए गए नायकों को पहचान देने का वक्त बीजेपी द्वारा उठाया गया यह मुद्दा इतिहास में हुई राजनीतिक पक्षपात की ओर इशारा करता है। क्या हम अपने असली नायकों को भुलाते रहेंगे और उन लोगों का महिमामंडन करेंगे जिन्होंने हिंदुओं पर अत्याचार किए? ‘केसरी चैप्टर 2’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उन नायकों को पहचान दिलाने का एक अवसर है, जिन्हें जानबूझकर भुला दिया गया। क्या अब भी कांग्रेस और वामपंथ इस सवाल का जवाब देंगे?

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