बारां में स्वामित्व योजना के तहत गांवों का डिजिटलीकरण तेजी से हो रहा है। जिले के 1057 सर्वे योग्य गांवों में से 1035 गांवों का ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है। इनमें से 1007 गांवों के डिजिटल नक्शे तैयार होकर ग्राम पंचायतों को सौंप दिए गए हैं। स्वामित्व योजना की प्रगति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि अब तक 59,847 परिवारों को प्रॉपर्टी पार्सल और पट्टों का वितरण किया जा चुका है। 769 गांवों के कुल 84,255 प्रॉपर्टी पार्सल प्राप्त हुए हैं। इनमें से 379 गांवों में पूर्ण वितरण हो चुका है। 9,251 पट्टे ई-पंचायत पोर्टल पर ऑनलाइन किए जा चुके हैं। हालांकि, 22 गांवों में राजस्व रिकॉर्ड के नक्शे कटे-फटे या अनुपलब्ध होने के कारण ड्रोन सर्वे नहीं हो पाया है। इससे इन गांवों के निवासियों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। नोडल अधिकारी कन्हैयालाल सुमन के अनुसार, डिजिटल नक्शों से आबादी भूमि का सीमांकन स्पष्ट हो गया है। इससे पट्टा आवेदन प्रक्रिया सरल होगी और आबादी क्षेत्र में स्थित भूमि के लिए पट्टे देने से मना नहीं किया जा सकेगा। साथ ही, रास्ते और संपत्ति संबंधी विवादों का त्वरित समाधान संभव होगा। वर्तमान में लगभग 15,773 परिवारों को प्रॉपर्टी पार्सल का वितरण किया जाना शेष है। यह योजना केंद्र सरकार द्वारा 24 अप्रैल 2020 को शुरू की गई थी। जिले के कुल 1,224 राजस्व गांवों में से आबादी वाले 1,057 गांवों का चयन किया गया है। ड्रोन सर्वे से ऐसे बना है डिजिटल नक्शा
अधिकारियों के अनुसार ड्रोन के माध्यम से प्रत्येक मकान, रास्ता, खाली प्लॉट का सर्वे हुआ है। इसमें लंबाई-चौड़ाई सभी दर्ज हुई है। एक-एक मकान अलग से देखा जा सकता है। इनका सर्वे समिति के माध्यम से भौतिक सत्यापन भी करवाया जा रहा है। जिनके पट्टे नहीं बने हैं, उनको जल्द पट्टे मिल सकेंगे। जिससे लोगों को लोन लेने, संपत्ति का अन्य उपयोग करने में आसानी होगी। राजस्व रिकार्ड के नक्शे उपलब्ध नहीं होने व कटे-फटे होने से आ रही परेशानी
सूत्रों ने बताया कि किशनगंज व शाहाबाद ब्लॉक के बालापुरा, चिंडालिया, गणेशपुरा, कुंडी, परानिया, रेलावन, कुंदा, कागला बमोरी, किराड़ पहाडी, बिची, घेसुंआ, ढ़िकवानी, रातई, देवरी वीरान, सिरसोद खुर्द, सेमली फाटक, हरिपुरा, नारायण खेड़ा, बाल्दा, चिंडालिया, केलवाड़ा, शंकर कॉलोनी आदि गांवों के राजस्व रिकार्ड के नक्शे उपलब्ध नहीं होने तथा अत्यधिक कटे-फटे होने के कारण यहां ड्रोन सर्वे नहीं हो सका है। ऐसे में यहां डिजिटल नक्शे भी तैयार नहीं हो पाए हैं। यहां भू-प्रबंध विभाग से नक्शे तैयार करवाए जाएं तो प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। नक्शे उपलब्ध नहीं होने के कारण यहां कई सालों से सीमाज्ञान, संपत्ति संबंधित विवादों के निपटारे आदि को लेकर समस्याएं बनी हुई है। इन गांवों में लोगों को फार्मर रजिस्ट्री के तहत भी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है


