भास्कर न्यूज | अंबिकापुर स्वामी विवेकानंद की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर तुलसी साहित्य समिति द्वारा केशरवानी भवन में कार्यक्रम और काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व व्याख्याता सच्चिदानंद पांडेय थे, जबकि अध्यक्षता शायर-ए-शहर यादव विकास ने की। विशिष्ट अतिथि गीता मर्मज्ञ पं. रामनारायण शर्मा, कवि चंद्रभूषण मिश्र और दुर्गाप्रसाद श्रीवास्तव रहे। संचालन वरिष्ठ कवि अजय सागर ने किया। मां वाग्देवी की सामूहिक पूजा और कवयित्री नीलिमा जायसवाल द्वारा प्रस्तुत मनोहारी सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का आगाज हुआ। महाकवि तुलसीदास, बीडी लाल और सुरेश जायसवाल द्वारा रचित रामायणों का संक्षिप्त पाठ किया गया। विशिष्ट अतिथि पं. रामनारायण शर्मा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद केवल एक संत नहीं, बल्कि महान देशभक्त और मानवता प्रेमी थे। उन्होंने बताया कि किस प्रकार गुरु रामकृष्ण परमहंस के सानिध्य में नरेंद्र दत्त ‘विवेकानंद’ बने। स्वामी जी ने उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको का नारा देकर युवाओं में अदम्य इच्छाशक्ति भरी। उनके क्रांतिकारी विचारों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित हजारों क्रांतिकारियों को स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरित किया। शिकागो (1893) के विश्व धर्म सम्मेलन को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि स्वामी जी ने हिंदू धर्म को ‘सभी धर्मों की जननी’ बताया और युद्ध के स्थान पर शांति व विनाश के स्थान पर निर्माण का वैश्विक संदेश दिया। मुख्य अतिथि सच्चिदानंद पाण्डेय ने स्वामी विवेकानंद के 1877 से 1879 तक रायपुर प्रवास का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है कि स्वामी जी का चरित्र-निर्माण और विश्व भ्रमण की आकांक्षा रायपुर की पावन धरा पर ही जागृत हुई थी। उन्हीं की स्मृति में रायपुर के आश्रम का नाम ‘श्री रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम’ रखा गया है। कवि संतोष सरल ने युवावर्ग की विशेषताओं का बखूबी वर्णन किया युवा तो बहती ठंडी हवा है। युवा बीमार की दवा है। युवा सुबह की सुनहरी धूप है, युवा विवेकानंद का रूप है। संस्था के अध्यक्ष कवि मुकुन्दलाल साहू ने युवा वर्ग में बढ़ती नशाखोरी की प्रवृत्ति पर चिंता जाहिर करते हुए उसे छोड़ने का आग्रह अपने दोहे में युवाओं से किया- यह जीवन अनमोल है, रहे हमेशा याद। इसे नशे में डूबकर करें नहीं बर्बाद। वरिष्ठ गीतकार उमाकांत पांडेय का दर्द उनकी गजल में छलक पड़ा- मैंने माना रुसवाई बहुत है, मगर ऐ जिंदगी तू रास आई बहुत है। तेजपुंज भारत का अनुपम मान थे स्वामी विवेकानंद: चौबे काव्यगोष्ठी में वरिष्ठ कवि जयप्रकाश चौबे ने जहां स्वामी विवेकानंद के महान शख्सियत के विषय में बताया कि यह सन्यासी, वह तेजपुंज भारत का अनुपम मान था। जिसके कठ में गूंज रहा, वेदों का पावन ज्ञान था। वहीं कविवर श्यामबिहारी पांडेय ने तो यहां तक कह दिया कि जवानी हो अगर मुमकिन विवेकानंद जैसी हो। उमर थोड़ी ही हो लेकिन विवेकानंद जैसी हो। युवा दिवस पर कवि अजय सागर ने युवाओं को कुछ नया करने का आह्वान किया।


