अद्वैत आश्रम हरभांवता में बुधवार को ब्रह्मलीन स्वामी हीरानंद जी महाराज की 61वीं महापरिनिर्वाण तिथि धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाई गई। यह आयोजन श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद जी महाराज के सान्निध्य में हुआ। स्वामी हीरानंद जी महाराज ने वर्ष 1965 में इसी आश्रम में ब्रह्मलीन समाधि ली थी। तब से हर साल गुरु अष्टमी पर यह आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों साधक आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं। आश्रम को आकर्षक लाइट डेकोरेशन से सजाया गया था, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। गुरुवार शाम से भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें भजन मंडलियों ने गुरु महिमा के भजन प्रस्तुत किए। यह भजन संध्या देर रात तक चली। कार्यक्रम की शुरुआत बुधवार दोपहर को गुरु पूजन के साथ हुई। इसके बाद ब्रह्मलीन स्वामी हीरानंद जी महाराज और ब्रह्मलीन सेवानंद जी महाराज की समाधियों पर महाआरती की गई। महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी महाराज सहित हजारों साधकों ने दोनों समाधियों पर पूजा-अर्चना की। महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद ने गुरुओं को चोला चढ़ाया, और पंडितों द्वारा पूजा-अर्चना संपन्न करवाई गई। महाआरती के बाद भक्तों को महाप्रसादी का वितरण शुरू किया गया। प्रसादी के लिए 7 बोरी चीनी की नुक्ती, पूड़ी और दाल तैयार की गई थी। आयोजन में 9 हजार भक्तों के पहुंचने की संभावना है। हरभांवता, लुहारा, करेड़ा, कोथून, गुंसी, मुंडिया, दहलोद, ललवाड़ी, करेड़ा बुजुर्ग, तुर्किया, हिंगोनिया, दतवास, मित्रपुरा, निवाई, चाकसू सहित टोंक, सवाई माधोपुर, जयपुर, करौली और दौसा जिलों से श्रद्धालु महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद महाराज का आशीर्वाद लेने पहुंचे।


