स्विट्जरलैंड जाना चाहती थी सुरभि…अब साध्वी बनी गई:रायपुर के 8 सदस्य बने मुमुक्ष, इनमें 13-16 तक के बच्चे, माता-पिता समेत बच्चों ने छोड़ा घर

छत्तीसगढ़ के रायपुर में जैन समाज के अलग-अलग परिवार के 8 सदस्यों ने सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया है। वह मुमुक्ष बनने जा रहे हैं। इनमें 27 साल की युवती और 13 से 16 साल के 3 बच्चे भी शामिल हैं। गुरु ने सभी की परीक्षा ली। 18 घंटे नंगे पांव चलाकर देखा गया। इसके बाद मुमुक्ष बनने की अनुमति मिली। गुरु योग तिलक सुरीश्वर ने कहा कि जैन धर्म जितना त्याग और तप शायद ही किसी दूसरे धर्म में हो। जब इसी तप को कोई अपना वास्तविक सुख मान ले तब उसे मुमुक्ष या मुक्ति पाने की इच्छा रखने वाला कहा जाता है। यह सब संभव होता है, एक सच्चे मार्गदर्शन से। गुरु योग तिलक सुरीश्वर ने बताया कि शिष्यों की त्याग और तपस्या देखकर उन्हें मुक्ति के रास्ते पर चलने के लिए चुना। 8 मुमुक्षुओं पर इनके परिवार समेत पूरे जैन समाज को गर्व है। पढ़िए कैसे कठिन तप के बाद कठिन रास्ते पर चलने के लिए तैयार हुए हैं… आधुनिक ख्यालों वाली सुरभि बनेगी साध्वी 27 साल की सुरभि भंसाली ने मास्टर ऑफ फूड टेक्नोलॉजी का कोर्स किया है। सुरभि आधुनिक ख्याल वाली थी। उसे दोस्तों के साथ घूमने, खाने पीने और इंजॉय करना बहुत पसंद था। उनकी माता बदामी बाई भंसाली ने बताया कि सुरभि को स्विट्जरलैंड और कश्मीर घूमने का शौक था। वह वर्ल्ड टूर पर जाना चाहती थी। सुरभि सोशल मीडिया में भी एक्टिव रहती थी लेकिन इस बीच वह चातुर्मास में शामिल हो गई। चातुर्मास जैन समाज का एक आध्यात्मिक पर्व है, जिसमें साधु और साध्वी तप साधना और भजन करते हैं। चातुर्मास के बाद सुरभि ने अपना जीवन धर्म के रास्ते पर चलने का तय किया। उनके भाई दिव्यांश को जब पता चला तो वह आश्चर्य हो गए। जब यह बात अन्य घर वालों को पता चली तो उन्हें गर्व महसूस हुआ। 14 और 16 साल के बच्चे भी बनेगें मुमुक्ष आम्रपाली सोसायटी के रहने वाले आशीष सुराना (44) अपनी पत्नी रितु सुराना (42) अपने दोनों बच्चों आर्यन सुराना (16) और आरुष सुराना (14) के साथ मुमुक्ष बन रहे हैं। एक ही परिवार के चार सदस्य मुमुक्ष बनकर एक दूसरे से और अपने परिवार से हमेशा के लिए दूर चले जाएंगे। उनका आपस में सांसारिक रिश्ता पूरी तरह खत्म हो जाएगा। 18 घंटे नंगे पैर चले, कठिन तप किया फिर मुमुक्ष बनें आशीष सुराना के बड़े भाई रितेश सुराना ने बताया कि आशीष हमेशा से धार्मिक प्रवृत्ति का रहा है। उन्होंने अपने गुरुओं के सामने अन्य जीवन धर्म के लिए लगाने की इच्छा जताई। इस राह पर आशीष की पत्नी रितु और दोनों बच्चों आर्यन और आरुष भी जुड़ गए। गुरु ने पूरे परिवार की कड़ी परीक्षा ली। दोनों बच्चों को कई दिनों तक नापसंद चीजें सिर्फ एक टाइम खिलाई गई। 18 घंटे नंगे पांव चलाकर देखा गया। गुरु की कठिन से कठिन परीक्षा में परिवार सफल हो गया। बैग का होलसेल बिजनेस बेच दिया आशीष सुराना का रायपुर में होलसेल बैग का बिजनेस था। मोक्ष का रास्ता चुनने से पहले उन्होंने अपनी दुकान बेच दी। परिवार के लोगों के साथ कुछ समय बिताया। फिर अपने पत्नी और बच्चों के साथ मुमुक्ष बनने की राह पर निकल पड़े। उनके परिवार की एक अन्य सदस्य नंदिता सुराना का कहना है कि आर्यन और आरुष बहुत चंचल बच्चे थे। लेकिन उन्होंने खुद से मुमुक्ष बनने की इच्छा जताई। परिवार के लिए सबसे कठिन निर्णय बच्चों को मोक्ष के रास्ते पर भेजना था। लेकिन अब परिवार को गर्व है। 13 साल का तनिष भी बनेगा मुमुक्ष रायपुर के दावड़ा कॉलोनी का रहने वाला 13 साल का तनिष सोनिगरा भी मुमुक्ष बनने वाला है। उनके पिता प्रमोद और माता शीतल सोनिगरा ने बताया कि तनिष दो बेटों में छोटा है। उसने धार्मिक स्थानों पर जाकर गुरुओ के संपर्क में रहा फिर खुद से कहा कि उसे दीक्षा लेनी है। शुरुआत में मन नहीं माना। कोई भी मां-बाप यह कभी नहीं चाहेगा कि उसका बच्चा उससे दूर हो जाए। लेकिन जब तनिष झुकाव मोक्ष के रास्ते पर देखना तो हमने कठिन निर्णय लिया। तनिष कि माता ने बताया कि तनिष को रोटी सब्जी खाना पसंद नहीं था। वह हर दिन नए-नए खाने की डिमांड करता था। उसे फिल्म देखने का भी शौक था, लेकिन मुमुक्ष बनने के बाद जीवन उसका पूरी तरह बदल जाएगा। उसने इस जीवन को खुद चुना है हम उसके धर्म के रास्ते जाने पर गर्व महसूस कर रहे हैं। माता-पिता बने मुमुक्ष, बेटा बोला-हमेशा याद करूंगा इसी तरह रायपुर के शैलेंद्र संकलेचा (49) और उनकी पत्नी एकता संकलेचा (47) सदर बाजार के रहने वाले हैं। उनके बेटे यश ने बताया कि मम्मी पापा ने मुमुक्ष बनने का निर्णय बताया। शुरुआत में तो लगा कि उनके बिना आगे अब कैसा जीवन होगा। लेकिन फिर हमने उनके जीवन के बारे में सोचा। हर किसी को अपने जीवन में वास्तविक सुख पाने का अधिकार है। मां बाप ने हमारे लिए बहुत कुछ किया। अब वे खुद के लिए कुछ करना चाहते हैं तो हमें सपोर्ट करना चाहिए। मुमुक्ष बनने के बाद कैसा होता है जीवन दरअसल मुमुक्ष (मोक्ष के रास्ते पर चलने वाला) बनने वाला व्यक्ति अपने गुरु से दीक्षा लेता है। उसे अपना नाम पहचान पूरी तरह बदलना होता है। उसकी पोशाक बदल जाएगी। खान पान रहन-सहन और जीवन पूरी तरह बदल जाएगा। मुमुक्ष के सांसारिक रिश्ते पीछे छूट जाएंगे। अगर कोई बेटा मुमुक्ष होता है तो वह अपनी मां को छू नहीं पाएगा। वहीं बहन अपने भाई से हमेशा के लिए दूर हो जाएगी। गुरु ही इनके सब कुछ रहेंगे वह इन्हें मार्गदर्शन करेंगे। मुंबई में होगा बड़ा कार्यक्रम 8 फरवरी को मुंबई में संयमरंग उत्सव होगा। जिसमें देश भर के 64 मुमुक्ष दीक्षा लेगें। इसमें रायपुर के आठ मुमुक्ष रहेंगे। इनमें तीन छोटे बच्चे, दो दंपती और एक युवती है। इनमें से चार लोग एक ही परिवार के हैं। इनके लिए रायपुर में श्री संयम मनोरथ उत्सव समिति ने 25 और 26 जनवरी को उत्सव कार्यक्रम रखा। इसमें जैन समाज के सभी घटक के लोग पहुंचे थे। सभी लोगों ने मिलकर इन्हें विदाई दी। ………………………. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… 15 साल की उम्र में उठाया समाज सेवा का संकल्प: 545 गांव पैदल घूमीं, हमले झेले;अब पद्मश्री से सम्मानित होंगी दंतेवाड़ा की डॉ बुधरी ताती छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की समाजसेवी डॉ. बुधरी ताती को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। कठिन हालात, दुर्गम बीहड़ों में पैदल सफर और जानलेवा खतरे के बावजूद उन्होंने साहस और जज़्बे के साथ काम किया और 500 से अधिक महिलाओं को जागरूक किया। पढ़ें पूरी खबर…

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