राजधानी के 18 चौक-चौराहों पर लगे ट्रैफिक सिग्नल बंद किए जा रहे हैं। वजह यह है कि सिग्नल की वजह से वहां जाम लग रहा है और वाहन फंस रहे हैं। जब सिग्नल बंद रहता है, तो ट्रैफिक स्मूथ चलता है और गाड़ियां आसानी से निकल जाती हैं। इसलिए सिग्नलों को बंद करने का फैसला किया गया है। धीरे-धीरे इन सिग्नलों को बंद किया जा रहा है और इन्हें दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। जबकि पहले सर्वे के आधार पर ही ये सिग्नल लगाए गए थे ताकि जाम की स्थिति न बने और ट्रैफिक सुचारू रहे। इसके लिए टेंडर निकाला गया था और सिग्नल लगाए गए थे। कुछ दिनों तक सिग्नल सुचारू चले, लेकिन बाद में इन्हें बंद करना पड़ा। अब पूरी तरह से इन्हें बंद करने का निर्णय लिया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सर्वे करने के बाद ही सिग्नल लगाए गए थे, क्योंकि कई जगह टी-जंक्शन है या फिर ट्रैफिक तीन-चार दिशाओं से आकर फंसता है। लोगों को आने-जाने में परेशानी होती थी, इसलिए सिग्नल लगाए गए थे। लेकिन शहर में लगातार ट्रैफिक का दबाव बढ़ रहा है। लोगों को इससे परेशानी हो रही है। इसलिए इन्हें बंद करने का फैसला लिया गया है। नगर निगम ने हटाए सिग्नलों को लगाने की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को दी है। सिग्नल लगाने के बाद मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी कंपनी की होती है। कंपनियां इसका खर्च विज्ञापन से निकालती हैं। सिग्नलों के ऊपर विज्ञापन लगाकर आय अर्जित की जाती है। लेकिन अब कंपनियां लापरवाही बरत रही हैं और अधिकांश पुरानी कंपनियों ने निगम से अपना काम समेट लिया है। एक चौक पर 10–12 लाख रुपये का मेंटेनेंस खर्च आता है, जिसे कंपनी को ही वहन करना होता है। सर्वे के आधार पर लगाए गए थे
राजधानी के ज्यादातर सिग्नल 2014–2015 में किए गए सर्वे के आधार पर लगाए गए थे। निगम ने तय किया था कि किन-किन चौकों पर सिग्नल लगने चाहिए। इसमें पुलिस की भी मदद ली गई थी। सर्वे के बाद ही सिग्नलों की स्थापना की गई। दावा किया गया था कि ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इन चौकों पर सिग्नल जरूरी हैं। इन्हीं में वे 18 चौक भी शामिल हैं, जहां अब सिग्नल हटाए जा रहे हैं। इन चौकों पर होंगे बंद भारत माता-शंकर नगर चौक, खम्हारडीह थाना चौक, देवेंद्र नगर चौक, ओलिया चौक मोतीबाग, महिला थाना चौक, नहरपारा चौक, आमापारा चौक, तात्यापारा चौक, लाखेनगर चौक, सिद्धार्थ चौक, केनाल रोड पंचशील नगर, रायपुरा, मोहबाबाजार समेत अन्य चौक शामिल हैं। छह साल से ज्यादा हो चुके लगे, दिक्कतें भी शहर में सिग्नल लगे 6 साल से अधिक हो चुके हैं। इनमें तकनीकी दिक्कतें लगातार बढ़ रही हैं। नियमित मेंटेनेंस न होने से कई सिग्नल बंद पड़े हैं। आईटीएमएस के तहत 2018 में शहर के 55 से ज्यादा चौक-चौराहों पर हाईटेक ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे। एक चौक पर सिग्नल लगाने की लागत 48-50 लाख रुपए आती है। ये सिग्नल ऑटो मोड पर काम करते थे और मैनुअल ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती थी। भास्कर एक्सपर्ट – समर पाटनी, रोड इंजीनियर बिना प्लानिंग लग गए कई सिग्नल राजधानी में कई जगह बिना उचित योजना के सिग्नल लगा दिए गए। अगर सही तरीके से प्लानिंग होती और सड़कों का सर्वे किया जाता, तो कई जगह सिग्नल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। रायपुर में ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ रहा है और वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले 25-30 वर्षों को देखते हुए सर्वे होना चाहिए। तकनीकी आधार पर तय करना चाहिए कि किस सड़क पर सिग्नल की जरूरत है और किस सड़क पर रोटरी की। जहां रोटरी की जरूरत थी, वहां भी सिग्नल लगा दिए गए। कुछ सड़कों पर बंद किए जा रहे हैं सिग्नल
शहर की कुछ सड़कों पर सिग्नल बंद किए जा रहे हैं, क्योंकि इनके कारण वहां जाम लग रहा है। इन सिग्नलों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है। – डॉ. लाल उमेद सिंह, एसएसपी रायपुर


