हड़ताल: सरकारी दफ्तरों में तालेबंदी, हितग्राही परेशान, स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित

भास्कर न्यूज | राजनांदगांव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी लागू करने की मांग पर छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने तीन दिवसीय हड़ताल का सोमवार से आगाज किया, जो 31 तक चलेगी। फेडरेशन ने हड़ताल स्थल कलेक्ट्रेट के सामने पहले दिन अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की। कलेक्ट्रेट, कंपोजिट भवन के सरकारी दफ्तरों में तालेबंदी रही। इसके साथ ही शिक्षकों के हड़ताल में शामिल होने की वजह से स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित रही। जिला पंचायत, एसडीएम और तहसील कार्यालय सहित अन्य दफ्तरों से हितग्राहियों को बैरंग लौटना पड़ गया। सप्ताह भर का शीतकालीन अवकाश खत्म होने के बाद 29 दिसंबर से स्कूल खुले। लेकिन शिक्षकों के हड़ताल में शामिल होने की वजह से प्राइमरी मिडिल से लेकर हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित रही। शिक्षा विभाग के अधिकांश कमरों में ताला लटका रहा। खाद्य विभाग, कृषि विभाग, नजूल, आबाकरी, में लगभग यहीं स्थिति रही। अधिकारी कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने से कुर्सियां खाली रहीं। सोमवार सप्ताह का पहला कामकाजी दिन होने से बड़ी संख्या में हितग्राही दफ्तरों में अपने कामकाज लेकर पहुंचे लेकिन बिना काम कराए लौटना पड़ा। प्रदर्शन में प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा, सचिव राजेश चटर्जी, उपाध्यक्ष मनीष मिश्रा, जिला संयोजक सतीश ब्यौहरे, जिला महासचिव पीआर झाड़े, संरक्षक डॉ. के एल टांडेकर, राम नारायण बघेल, भीषम ठाकुर, संतोष चौहान, वीरेंद्र कुमार रंगारी, अरुण देवांगन, संजय तिवारी, कृतलाल साहू, विनोद मिश्रा, बृजभान सिन्हा, हरीश भाटिया, मेघनाथ भूआर्य, नीलेश रामटेके सहित अन्य लोग मौजूद रहे। फेडरेशन की हड़ताल का चौतरफा असर रहा। उन्होंने अपनी प्रमुख मांगों पर जमकर नारेबाजी की। फेडरेशन के पदाधिकारियों ने विशाल सभा को संबोधित किया। इसका समाधान राज्य शासन स्तर से होना है। हड़ताल को देखते हुए विभागों में व्यवस्था बनाने कोई बैकअप प्लान या व्यवस्था नहीं की गई थी। अधिकतर विभागों में तालेबंदी रही या एक-दो कर्मचारी, चपरासी रहे जो हितग्राहियों को हड़ताल की जानकारी देकर तीन दिन बाद आने की सलाह देते रहे। फेडरेशन के जिला संयोजक सतीश ब्यौहरे ने बताया कि मोदी गारंटी लागू करने जुलाई में हड़ताल की मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा था। विधानसभा चुनाव के पहले कर्मचारियों से किया मोदी गारंटी का वादा सरकार ने पूरा नहीं किया। वादाखिलाफी के कारण फेडरेशन को दोबारा आंदोलन करने बाध्य होना पड़ा। धरना प्रदर्शन का आगाज किया गया। राजनांदगांव, डोंगरगांव, छुरिया, डोंगरगढ़ में कर्मचारी अधिकारियों ने आवाज बुलंद की।

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