निजी बस ऑपरेटर्स की सरकार की नीतियों के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रही। इसके चलते ऑल इंडिया परमिट की करीब 130 स्लीपर बसें और लगभग 1000 स्टेट कैरिज बसों का संचालन ठप हो गया। इससे रोजाना सफर करने वाले 15 से 20 हजार यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। रेती स्टैंड पर प्राइवेट बसें खड़ी रहीं और बस संचालक हड़ताल पर बैठे रहे। दूसरी ओर रोडवेज बसों में यात्री भार बढ़ा है। रूट पर चलने वाली बसें बंद रहने से ग्रामीण क्षेत्रों से उदयपुर आने वाले यात्रियों और मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत हुई। बड़ी संख्या में यात्रियों को राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के रोडवेज डिपो का रुख करना पड़ा। इसके चलते रोडवेज बस में डिपो पर खड़ी होते ही भर जा रही है। आगार प्रबंधक हेमंत शर्मा ने बताया कि अभी अतिरिक्त बसों को लगाने की जरूरत नहीं पड़ी है। यात्रीभार में इजाफा देखने को मिल रहा है। मंगलवार रात साढ़े नौ बजे उदयपुर रोडवेज बस स्टैंड पर अफरा-तफरी का माहौल रहा। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की जोधपुर जाने वाली बस डिपो पर लगते ही यात्री धक्का-मुक्की करते हुए अंदर चढ़ गए। हालात ऐसे बने कि ऑनलाइन बुकिंग कराने वाले यात्री बाहर ही रह गए, जबकि उनकी आरक्षित सीटों पर बिना टिकट यात्री बैठ गए। हड़ताल के चलते यात्रियों की भीड़ दोगुनी हो गई है। आमतौर पर रात की बसों में सीमित यात्री होते हैं, लेकिन इस बार बस की क्षमता से लगभग दोगुने लोग स्टैंड पर मौजूद थे। रिजर्व टिकट वाले यात्रियों को बस में घुसने तक की जगह नहीं मिली, जिससे विवाद और हंगामा खड़ा हो गया। कारण यह हैं कि जोधपुर ऐसा रूट हैं कि जहां आने-जाने के लिए निजी बसों के अलावा कोई सुविधा नहीं है। इस कारण इस रूट पर सबसे ज्याद दिक्कत आ रही है। जोधपुर रूट परेशानी, दूसरा साधन नहीं होने से एडवांस में लग्जरी बसें बुक हो रहीं : जोधपुर के लिए गुरुवार सुबह 6 बजे जानी वॉल्वो बस के सभी टिकट बुक हैं। इसके बाद सुबह 7:15 एसी डीलक्स आैर शाम 4 बजे जाने वाले वॉल्वो की 8-8 सीट बची हुई हैं। 48 सीटर इन बसों में अन्य सभी सीटें एडवांस में बुक हो चुकी हैं। इस तरह 27 फरवरी को सुबह 6 बजे वाली वाले वॉल्वो 8 सीट, एसी डीलक्स में 23 सीट, शाम 4 बजे वाली वॉल्वो बस में 8 सीट बीच हुई है। उदयपुर से जोधपुर की दूरी 250 किमी है। इस रूट पर ट्रेन उपलब्ध नहीं है। आरामदायक यात्रा के लिए यात्री वॉल्वो बसों की ओर जाते हैं। बस संचालकों की प्रमुख मांगें


