भोपाल के हथाईखेड़ा डैम में मत्स्याखेट यानी, मछली के पालन और शिकार पर मस्त्य विभाग के एक आदेश पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कड़ा एतराज जताया है। विभाग ने डैम में मत्स्याखेट पर रोक लगा दी है, जबकि कुछ दिन पहले सरकार ने मछुआरों को मछली पकड़ने से नहीं रोकने के आदेश दिए थे। इस पर सदस्य कानूनगो ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस्लामिक तुष्टिकरण के लिए प्रशासनिक मर्यादा भूल कर राज्य सरकार की शक्तियों के ऊपर मछली पालन विभाग भोपाल सहायक संचालक अतिक्रमण कर रहे हैं। भोपाल के करोड़ों की आमदनी वाले जिस तालाब पर राज्य सरकार के आदेश के तहत अतिक्रमणकारियों को हटाकर अनुसूचित जाति व हिंदू वंशानुगत मछुआरों का पुनः नियंत्रण स्थापित करवाया गया था। उसे अपनी शक्तियों के विपरीत जाकर विभाग इस आदेश के जरिए गरीब हिंदुओं को बेदखल करना चाहता है। ताकि रसूखदार और गुंडों का कब्जा हो सके। यह राज्य की नीति उल्लंघन है। ये दो आदेश, जिस पर नाराजगी
24 दिसंबर को इस्लाम नगर मत्स्योद्योग सहकारी समिति मर्यादित भोपाल के सदस्यों को मत्स्याखेट न करने और समिति सदस्यों को समिति से हटाने के संबंध में मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग ने आदेश जारी किया था। सुनीता मालवीय, रमशु कुमार भूरिया, राधेश्याम मालवीय, नितिन अहिरवार, जगदीश अहिरवार, मधुरा प्रसाद, सेवदीन केवट, देवीदीन केवट ने शिकायत की थी कि उन्हें मत्स्याखेट करने से रोका जा रहा है। इस पर विभाग को आदेश दिए थे कि इन मछुआरों को मत्स्याखेट करने से नहीं रोका जाए। इस आदेश के बाद जिला विभाग से 1 जनवरी को आदेश जारी हुआ। जिसमें बलपूर्वक मत्स्याखोट होने से विवाद की स्थिति का हवाला देते हुए रोक लगाने के आदेश दिए गए हैं।


