जल संसाधन विभाग के भाखड़ा-सिद्धमुख रेगुलेशन खंड ने भाखड़ा प्रणाली की नहरों के लिए साप्ताहिक वरीयताक्रम जारी कर दिया है। यह व्यवस्था 18 से 26 जनवरी तक प्रभावी रहेगी। इस कार्यक्रम के तहत जिले की विभिन्न नहरों में निर्धारित मात्रा में पानी छोड़ा जाएगा, जिससे सिंचाई व्यवस्था सुचारु बनी रहे। विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मोरजण्डा (एमजेडी) नहर में 263 क्यूसेक, प्रतापपुरा (पीटीपी) में 438 क्यूसेक, नाथवाना (एनटीडब्ल्यू) में 469 क्यूसेक, रतनपुरा (आरटीपी) में 481 क्यूसेक, मोडिया (एमओडी) में 686 क्यूसेक, सूरतपुरा (एसटीपी) में 695 क्यूसेक, दीनगढ़ (डीएनजी) में 708 क्यूसेक, हरिपुरा (एचआरपी) में 721 क्यूसेक और लोंगवाला (एलजीडब्ल्यू) नहर में 866 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। इसी क्रम में पीलीबंगा (पीबीएन) नहर में 1081 क्यूसेक, नवां-सतीपुरा (एनडब्ल्यूएन) में 1092 क्यूसेक, रोड़ांवाली (आरआरडब्ल्यू) में 1105 क्यूसेक, अमरपुरा (एएमपी) में 1200 क्यूसेक, सूरतगढ़ (एसटीजी) में 1320 क्यूसेक, भगतपुरा (बीजीपी) में 1358 क्यूसेक, संगरिया (एसएनजी) में 1364 क्यूसेक और नगराना (एनजीडी) नहर में 1372 क्यूसेक पानी प्रवाहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, लीलांवाली (एलएलडब्ल्यू) नहर में 1612 क्यूसेक, भाखरांवाली (बीकेडब्ल्यू) में 1617 क्यूसेक, करनीसिंह (केएसडी) में 1947 क्यूसेक, मम्मड़खेड़ा (एमएमके) में 2142 क्यूसेक और जोड़कियां (जेआरके) नहर में 2222 क्यूसेक पानी छोड़े जाने का प्रावधान है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक नहर को आठ दिन तक पूरी क्षमता से चलाने के बाद बंद किया जाएगा। नहरों में पानी के उतार-चढ़ाव और किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए, यदि किसी नहर के रेगुलेशन में बदलाव की आवश्यकता पड़ती है, तो भाखड़ा-सिद्धमुख रेगुलेशन खंड और जल संसाधन खंड प्रथम व द्वितीय के अधिशासी अभियंताओं से विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि पानी की वास्तविक मात्रा मांग के अनुसार निर्धारित की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर इसमें कभी भी कमी की जा सकती है।


