हर साल हजारों क्विंटल गेहूं उगाने वाले किसान भी सरकार से फ्री का गेहूं ले रहे हैं। प्रदेश में ऐसे 10,500 किसान सामने आए हैं, जो हर साल 10,000 किलो से ज्यादा गेहूं एमएसपी पर बेच रहे हैं और खाद्य सुरक्षा के तहत फ्री का गेहूं ले भी रहे हैं। भास्कर ने मामले की पड़ताल की तो सामने आया कि प्रदेश के सभी जिलों में ऐसे किसान नहीं है। 9 जिले ऐसे हैं जहां के एक भी बड़े किसान ने फ्री का गेहूं नहीं उठाया, लेकिन कुछ जिलों में ऐसे हजारों किसान हैं। सबसे अधिक हनुमानगढ़ जिले के 3195 किसानों के नाम इस लिस्ट में शामिल हैं। बांसवाड़ा में ऐसे 52 किसानों के नाम सामने आए हैं। इनमें 6 किसान तो ऐसे हैं जिन्होंने गत वर्ष 20 हजार किलो से अधिक गेहूं सरकार को समर्थन मूल्य पर बेचा। कुछ किसान संगठनों का मानना है कि खरीदने और बेचने की स्वतंत्रता पर प्रश्न नहीं उठना चाहिए। नीति-निर्माताओं का तर्क है कि अनाज उन लोगों को मिलना चाहिए, जिन्हें वास्तव में जरूरत है। बता दें कि विभाग ने 100 क्विंटल का पैमाना तय किया है। इन जिलों में 1 भी नहीं बालोतरा, बाड़मेर, डिडवाना-कुचामन, डूंगरपुर, जैसलमेर, जोधपुर, नागौर, सलूंबर, सिरोही। बांसवाड़ा में एनएफएसए लाभार्थी किसानों ने गेहूं बेचा सक्षम मिले तो मुफ्त गेहूं बंद होगा एमएसपी-एनएफएसए में जन आधार जरूरी, इसी से खुलासा प्रदेश में समर्थन मूल्य पर अनाज बेचने के दौरान जन आधार की भी आवश्यकता पड़ती है और एनएफएसए में भी लाभार्थी का जन आधार नंबर जोड़ा जाता है। इस जन आधार नंबर के मिलान पर ही इन किसानों की पहचान सामने आई। अपात्रों के राशन कार्ड निरस्त होंगे प्रदेश में 10 हजार से अधिक ऐसे किसान सामने आए हैं। अब विभाग इन किसानों की आर्थिक स्थिति की जांच कर इन्हें अपात्र लाभार्थों की श्रेणी में शामिल कर राशन कार्ड निरस्त करेगा। सरकार का मानना है कि इससे वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को अधिक लाभ मिलेगा। – – ओमप्रकाश जोतड़, जिला रसद अधिकारी, बांसवाडा


