हमारी हरियाली के हत्यारे कौन?:24 मई को एक ही दिन में दी गईं 237 मंजूरियां

जिस बैठक में मस्तीपुरा में खनन को मंजूरी, उसी में 236 और को हरी झंडी मिली, इनकी जांच कब? भोपाल के बैरसिया विधानसभा क्षेत्र के मस्तीपुरा गांव में जिस सरकारी जमीन पर घना जंगल है, वहां खनन की मंजूरी मप्र स्टेट एनवायरोमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (सिया) की बैठक को बायपास करके दी गई। दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद यहां पेड़ों की कटाई पर रोक तो लग गई, लेकिन अब पूरी पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, जिस दिन मस्तीपुरा में खनन की मंजूरी दी गई, उसी दिन यानी 24 मई 2025 को प्रदेश में कुल 237 खदानों को डीम्ड पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) जारी की गई। नियमों के मुताबिक, किसी भी खनन परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी देने से पहले स्पेशल एक्सपर्ट एप्रेजल कमेटी तकनीकी जांच करती है। इसके बाद सिया की बैठक में विस्तृत अप्रैजल अनिवार्य होता है। लेकिन इन 237 मंजूरियों से पहले करीब 45 दिनों तक सिया की बैठकें नहीं बुलाई गईं। इसके बाद तत्कालीन प्रमुख सचिव पर्यावरण नवनीत मोहन कोठारी के अनुमोदन पर एप्को के अस्थायी कार्यकारी निदेशक आर. उमा महेश्वरी, जो तब सिया के पदेन सदस्य सचिव भी थे, ने एक ही दिन में 237 डीम्ड ईसी जारी कर दीं। इस प्रक्रिया पर सिया के तत्कालीन चेयरमैन शिव नारायण सिंह चौहान व नवनीत कोठारी के बीच विवाद भी हुआ। बाद में सरकार ने कोठारी और महेश्वरी को उनके पदों से हटा दिया। अभी केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की विजिलेंस टीम मामले की जांच कर रही है, पर कोई सार्वजनिक समीक्षा नहीं आई है। जहां पूरा जंगल, वहां दो प्रोजेक्ट के लिए सिर्फ 53 पेड़ बताए, कहा- इनमें भी सिर्फ 9 कटेंगे मस्तीपुरा के खसरा नंबर-2 की जिस सरकारी जमीन पर हजारों हरे-भरे पेड़ हैं, वहां मुरम-कोपरा खनन के लिए पर्यावरणीय मंजूरी आवेदनों में एक प्रोजेक्ट में सिर्फ 10 और दूसरे में 43 पेड़ दर्शाए गए। दावा भी किया गया कि या तो एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा, या फिर सिर्फ 9 पेड़ काटे जाएंगे। पूर्व सिया चेयरमैन बोले- तथ्य छिपाकर दी मंजूरी ^मस्तीपुरा की खसरा नंबर-2 की खदानों का मामला जांच और मूल्यांकन के लिए सिया के पास आया ही नहीं। तत्कालीन मेंबर सेक्रेटरी व प्रमुख सचिव पर्यावरण ने कानून के खिलाफ जाकर डीम्ड ईसी जारी की, जिससे माफिया व अफसरों की मिलीभगत सामने आती है। पूर्व खनन निदेशक मस्तीपुरा की सैद्धांतिक मंजूरी रद्द कर चुके थे। जांच होती तो पर्यावरणीय मंजूरी रद्द होना तय था। ऐसे 237 मामलों में तथ्य छिपाकर, चुनिंदा तरीके से डीम्ड ईसी दी गईं।’ -शिव नारायण सिंह चौहान, तत्कालीन सिया चेयरमैन

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