हमारे चरित्र में कोई दोष न लगे, हमें वैसा ही कार्य करना है: मुनि वीरभद्र

जैन बगीचे के नए हाल में चातुर्मासिक प्रवचन के तहत शुक्रवार को मुनि विनय कुशल श्रीजी के शिष्य मुनि वीरभद्र (विराग) श्रीजी ने कहा कि धर्म करने का कोई भी मौका मिले तो मत चुकिए। शरीर की पीड़ा को भी भक्ति बनाकर आराधना कीजिए। आप निश्चित ही मोक्ष मार्ग में आगे बढ़ेंगे। कहा कि कुछ घटनाएं ऐसी होती है जिससे कुछ लोगों को आनंद आता है और कुछ लोग दुखी हो जाते हैं। सुख-दुख को ध्यान से हटाकर हमें आराधना की ओर ध्यान देना होगा, तभी हमारे भाव मजबूत होंगे। हमें इस भव (संसार) में ही इतनी साधना कर लेनी है कि हम आत्म कल्याण के मार्ग की ओर आगे बढ़ जाएं। संयम जीवन में काफी चुस्तता रहती है और चरित्र निर्मल बनता है। हमारे चरित्र में कोई दोष न लगे, हमें वैसा कार्य करना है। धर्म का मूल चरित्र और औचित्य का पालन करना ही है। आत्म कल्याण के मार्ग की ओर कदम बढ़ाएं: मुनि श्रीजी ने कहा कि आज व्यक्ति अपना फायदा देखता है, दूसरे को क्या नुकसान हो रहा है, इससे उसको कोई मतलब नहीं रहता। पड़ोसी के घर तमाशा देखने में लोगों को उत्साह रहता है, किंतु जब अपने घर तमाशा होता है तो वह नहीं चाहता कोई उसे देखे। कहा कि अच्छी खबर फैलने में समय लगता है, जबकि बुरी खबर फैलने में कोई समय नहीं लगता। कहा कि अफवाहों से बचें और अपने आपको ध्यान, साधना में लगाकर आत्म कल्याण के मार्ग की ओर कदम बढ़ाएं।

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