भरतपुर। देवस्थान विभाग के आत्मनिर्भर श्रेणी के बिहारी जी मंदिर से हीरा व चांदी की जूती गायब होने के प्रकरण में जांच को लेकर प्रशासनिक रवैये पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस प्रकरण को लेकर विधायक सुभाष गर्ग द्वारा पत्र लिखकर जांच की मांग किए जाने के बावजूद अब देवस्थान विभाग ने हीरा जांच की जिम्मेदारी शिकायतकर्ता पर ही डाल दी है। सहायक आयुक्त मुकेश मीणा ने स्पष्ट कहा कि विभाग के पास हीरा जांचने के लिए कोई अधिकृत जौहरी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यह तय करना कि वह हीरा असली है या नहीं, शिकायतकर्ता को स्वयं प्रमाणित जौहरी या लैब से जांच करानी होगी। सहायक आयुक्त का कहना है कि यदि शिकायतकर्ता जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराता है, तभी उसके आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। बिना तकनीकी प्रमाण के प्रशासन किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकता। जौहरी लाने का जो भी खर्चा होगा। वह खर्चा दे दिया जाएगा। वहीं, शिकायककर्ता मीरा बंसल ने बताया िक साढ़े चार लाख रुपए से भी अधिक कीमती का हीरा व चांदी की जूती चढ़ाने के बाद देवस्थान तब भी चक्कर काटे की रसीद कट जाए। कई िदनों तक चक्कर काटे तब भी रसीद विभाग ने नहीं दी। अब शिकायत की हीरा व चांदी की जूती गायब होने पर तो खुद ही जौहरी लाकर चेक कराने की बात कही जा रही है। हर तरीके से शिकायत करने वाला ही हर जगह चक्कर काटे।


