हरदा में पिछले साल हुए पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट की पहली बरसी पर पीड़ित परिवारों ने गुरुवार को कैंडल मार्च निकाला। घंटाघर चौक पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने मौन धारण कर हादसे में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्हें एक साल बाद भी घर नहीं मिला है, वे अभी भी राहत शिविर में रह रहे हैं। बता दें कि इस हादसे में 13 लोगों की जान चली गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। साथ ही 59 परिवार बेघर हो गए थे। एनजीटी के आदेश पर प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को 15-15 लाख रुपए का मुआवजा दिया है। आईटीआई बिल्डिंग में रह रहे परिवार वर्तमान में 39 परिवारों के 126 लोग हरदा की आईटीआई बिल्डिंग में अस्थाई रूप से रह रहे हैं, जहां एक कमरे में दो से तीन परिवार चादरों से पार्टीशन बनाकर रह रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि 19 प्रभावित परिवारों को पीएम आवास योजना का लाभ दिया गया है। कलेक्टर आदित्य सिंह के अनुसार, कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के तहत सभी प्रभावितों को उनके घरों में हुई वास्तविक क्षति के अनुरूप पूरी राशि दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। एनजीटी के आदेशानुसार गंभीर घायलों को 5 लाख और साधारण घायलों को 3 लाख रुपए का मुआवजा तय किया गया है। क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 5-5 लाख रुपए की राशि निर्धारित की गई है। इस मामले में आरोपी राजू अग्रवाल द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिस पर 11 फरवरी को अंतिम सुनवाई होगी। इस दौरान हरदा कलेक्टर मकानों को हुई क्षति और घायलों के इलाज पर खर्च हुई वास्तविक राशि के दस्तावेज पेश करेंगे, ताकि प्रभावितों को पूरा मुआवजा मिल सके।


